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लक्ष्मीनारायण रंगा प्रज्ञा सम्मान  का तीसरा राज्य स्तरीय   

समारोह का भव्य  आयोजन संपन्न

 
THE BIKANER NEWS:- स्व. लक्ष्मीनारायण रंगा का विराट व्यत्तित्व और कृत्तित्व विलक्षण -डाॅ. सुमंत व्यास*

 

*स्व. लक्ष्मीनारायण रंगा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पुरोधा-मधु आचार्य*

 

*स्व. लक्ष्मीनारायण रंगा साहित्य-रंगकर्म के अनथक यात्री रहे-मालचंद तिवाड़ी*

*सम्मानित विभूतियों डाॅ. डुकवाल, डाॅ. सोनी एवं राठौड़ की सेवाएं प्रेरणादायक है: डाॅ. व्यास*

*बीकानेर 23 मई, 2026*प्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट के साझा आयोजन के तहत नागरी भण्डार स्थित नरेन्द्र सिंह आॅडिटोरियम में देश के ख्यातनाम साहित्यकार रंगकर्मी चिंतक एवं शिक्षाविद् कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा द्वारा समाज व परिवार को सौंपी गई शब्द-रंग की विरासत को सहेजने के उपक्रम में उनकी पावन स्मृति में तीसरे राज्य स्तरीय लक्ष्मीनारायण रंगा प्रज्ञा सम्मान समारोह का भव्य आयोजन हुआ।

समारोह के मुख्य अतिथि राजुवास के कुलगुरु तथा देश के ख्यातनाम पशु चिकित्सा विज्ञान के विद्वान डाॅ. सुमंत व्यास ने अपने विचार रखते हुए स्व. रंगा के विराट व्यक्त्तित्व और कृत्तित्व को विलक्ष्ण बताते हुए कहा कि उनके द्वारा विभिन्न कलानुशासनों को प्रदान की गई समर्पित सेवाएं प्रेरणादायक तो हैं ही, साथ ही नई पीढ़ी को संस्कार प्रदान करने एवं मार्गदर्शन के लिए उपयोगी भी रहेगी। डाॅ. व्यास ने लक्ष्मीनारायण रंगा को विलक्षण प्रतिभा का धनी बताया। उन्होने आगे कहा कि उनके द्वारा सृजित विराट साहित्य नई पीढ़ी के लिए प्रेरणापुंज है। रंगा की स्मृति में ऐसे महत्वपूर्ण आयोजन नगर की समृद्ध साहित्य परंपरा को नए आयाम देते हैं। जिसके लिए दोनों आयोजक संस्थाएं साधुवाद की पात्र हैं।  सम्मानित विभूतियों डाॅ. डुकवाल, डाॅ. सोनी एवं राठौड़ की सेवाएं प्रेरणादायक है।

प्रज्ञा सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार, रंगकर्मी एवं पत्रकार मधु आचार्य ’’आशावादी’’ ने कहा कि यूं ही कोई इंसान हर किसी के लिए बाऊजी नहीं बन जाता। इसके लिए जो व्यक्त्तित्व और कृत्तित्व चाहिए, वह स्व. रंगाजी का था, तभी तो हम कह सकते है कि वह समर्पित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पुरोधा थे। स्व. रंगा द्वारा समाज को दी गई समृद्ध साहित्य रंगकर्म और शिक्षा के क्षेत्र की विरासत हमारे लिए एवं आने वाली पीढ़ियों के लिए एक धरोहर है। इसी धरोहर को स्व. रंगा के परिवार ने संजोए रखा है। जिसके लिए वह साधुवाद का पात्र है।

समारोह के विशिष्ट अतिथि देश के ख्यातनाम साहित्यकार, चिंतक एवं आलोचक मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि स्व. रंगा सच्चे अर्थों में मेरे ही नहीं पूरे साहित्य एवं रंग जगत के बाऊजी थे। उन्होने साहित्य की सभी विधाओं में सृजन करते हुए कई नवाचार कर, विशेष तौर से राजस्थानी नाटकों आदि को भारतीय भाषाओं में प्रतिष्ठित किया। स्व. रंगा जीवन पर्यन्त साहित्य एवं रंगकर्म के साथ अन्य विधाओं में समर्पित रूप से सक्रिय रहे, तभी तो उन्हें साहित्य-रंगकर्म का अनथक यात्री कह सकते है।

समारोह के संयोजक वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने इस अवसर पर कीर्तिशेष रंगा से जुड़े कई अनछुए प्रसंग साझा करते हुए उनके द्वारा विभिन्न कलानुशासनांे में दी गई समर्पित सेवाओं को रेखांकित किया।

प्रारंभ में सभी का स्वागत करते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद् राजेश रंगा ने राज्य स्तरीय प्रज्ञा सम्मान से सम्मानित होने वाली विभूतियों यथा शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में डाॅ. विमला डुकवाल, साहित्य के क्षेत्र में डाॅ. सत्यनारायण सोनी एवं रंगकर्म के क्षेत्र में विजय सिंह राठौड़ की अपने-अपने क्षेत्र में दी गई महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक सेवाओं पर संक्षिप्त प्रकाश डाला।

प्रारंभ में लक्ष्मीनारायण रंगा के व्यक्त्तित्व और कृत्तित्व पर अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि उनके विराट रचना संसार को शब्दों में समेटना बड़ा मुश्किल है। लक्ष्मीनारायण रंगा के जीवन का मूल मंत्र ’’जब तक लिखूंगा-तब तक बचूंगा’’ इसी बात को उन्होंने जीवन पर्यन्त अपने विपुल लेखन से प्रमाणित किया।

तीसरे राज्य स्तरीय लक्ष्मीनारायण रंगा प्रज्ञा सम्मान के अर्पण के क्रम में डाॅ. विमला डुकवाल, डाॅ. सत्यनारायण सोनी एवं विजय सिंह राठौड़ को समारोह अध्यक्ष मधु आचार्य, मुख्य अतिथि डाॅ. सुमंत व्यास, विशिष्ट अतिथि मालचंद तिवाड़ी, समारोह संयोजक कमल रंगा एवं राजेश रंगा ने माला, श्रीफल, शाॅल, उपहार, रंगा की पुस्तकों का सेट एवं अभिनंदन पत्र अर्पित कर सम्मानित किया।

सम्मानित होने वाली तीनों विभूतियों अभिनंदन पत्र का वाचन का क्रमशः ज्योति प्रकाश रंगा, डाॅ. गौरीशंकर प्रजापत एवं क़़ासिम बीकानेरी द्वारा किया गया।

अपने सम्मान के प्रति उत्तर में बोलते हुए डाॅ. विमला डुकवाल ने कहा कि मुझे प्रज्ञा शब्द की गहराई पता है। मैं उसी दिशा में निंरतर कार्यरत रहूंगी और जिसे में चुनौती के रूप में स्वीकार भी करती हूं।  डाॅ. सत्यनारायण सोनी ने कहा कि रंगा की स्मृति में प्रज्ञा सम्मान मिलना मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है। इस सम्मान से मेरा सृजनरत रहने का दायित्व बढ़ गया है। इसी क्र्रम में विजय सिंह राठौड़ ने कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा से मैंने बहुत सीखा है, उन्होंनेे मेरी पीढ़ी के पहले वाली एवं बाद वाली पीढ़ी को रंगकर्म के संस्कार दिए, जो हमेशा प्रेरणादायी रहेंगे।

समारोह का सफल संचालन वरिष्ठ उद्घोषक ज्योति प्रकाश रंगा ने किया एवं सभी का आभार ज्ञापित युवा कवि गिरिराज पारीक ने किया। 

समारोह में विभिन्न कलानुशासनों के गणमान्यों में प्रमोद कुमार शर्मा, कृष्णचंद्र पुरोहित, भवानी सिंह राठौड़, जगदीश रतनू, डाॅ बसंती हर्ष, इन्द्रा व्यास, हरिनारायण आचार्य, अरूण जे व्यास, नंदकिशोर सोलंकी, हाजी मकसूद अहमद, गोपाल कुमार कुंठित, डाॅ. शिव बोधि, डाॅ. मुकेश  हर्ष, डाॅ. अजय जोशी, डाॅ. असीत गोस्वामी, डाॅ. चंचला पाठक, राजेन्द्र जोशी, डाॅ. फारूक चैहान, अविनाश व्यास, डाॅ. बृजरतन जोशी, योगेन्द्र पुरोहित, वली मौहम्मद गौरी, जीतसिंह, रमेश शर्मा, डाॅ. चन्द्रशेखर रंगा, प्रेम नारायण व्यास, आत्माराम भाटी, विजय सिंह शेखावत, चन्द्र आहुजा, मुनिन्द्र अग्निहोत्री, महेन्द्र जोशी, पृथ्वीराज रतनू, डाॅ. नमामि शंकर आचार्य, शिवचंद शर्मा, महावीर स्वामी, अमरसिंह खंगरोत, रामसहाय हर्ष, जाकिर अदीब, बुनियाद हुसेन जहीन, शंभुदयाल व्यास, हेम शर्मा, बाबुलाल छंगाणी, विपल्व व्यास, अमित आचार्य, प्रेम नारायण व्यास, हनुमान छिंपा, वसीम राजा कमल, अशोक सैन पप्पूजी, शाहीद अहमद, अशोक जोशी, सुनील शर्मा, पुनीत कुमार रंगा, दुर्गा रानी जोशी, इन्दु बाला व्यास, अरूणा मारू, यशोदा शर्मा, सीमा पालीवाल, हेमलता व्यास, दीपिका राजपूत, राजकुमारी रंगा, अंजू भादाणी, उमेश सिंह चैहान, आलोक कुमार जोशी, मनोहर लाल बिश्नोई, आशीष रंगा, मुकेश तंवर, भरत सिंह, सुमित शर्मा, प्रशांत जैन, पंकज जोशी, खुशनूर अहमद, मनीष सोनी, रवि शुक्ल, अमित गोस्वामी, रामकुमार जोहरड़, सौरभ कश्यप, आनंद छंगाणी, ममता व्यास, नवनीत आचार्य, महेश पुरोहित, दीपक गोदारा, महेश उपाध्याय, नवनीत व्यास, दीपक चैधरी, राहुल आचार्य, सी.पी. व्यास, मनमोहन व्यास, शिव दाधीच, शान्ति प्रसाद बिस्सा, भरत राजपुरोहित, रमेश मोदी, अंकित रंगा, तोलाराम सारण, घनश्याम ओझा, अख्तर अली, उमाशंकर व्यास, कन्हैयालाल पंवार, नवनीत पुरोहित, पुरुषोत्तम जोशी, ओम स्वामी, चन्द्र प्रकाश, गिरधर किराडू, रमजान अली, जयप्रकाश, दिनेश श्रीमाली, नितिन वत्स, चम्पालाल गहलोत, सलीम मोहम्मद, गोपाल गौतम, सुशील शर्मा सहित अनेकों की गरिमामय साक्षी रही।