देर रात क्यों चढ़े दो युवक पानी की टंकी पर,जाने वजह
जयपुर। छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर प्रदेशभर में छात्र नेताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इसी बीच मंगलवार देर रात दो छात्र पानी की टंकी पर चढ़ गए। इससे पुलिस और प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश के बाद दो छात्र देर रात करीब एक बजे पानी की टंकी से नीचे उतर आए। तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली। पानी की टंकी पर चढ़ने वाले दोनों छात्र नेता आज दोपहर उच्च शिक्षा मंत्री राजेंद्र यादव से मुलाकात कर छात्रसंघ चुनाव फिर से कराने की मांग करेंगे। इधर, भूख हड़ताल पर बैठे आठ छात्र नेताओं की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
जानकारी के मुताबिक छात्रसंघ चुनाव फिर से कराने की मांग को लेकर पिछले 3 दिन से छात्र नेताओं का धरना-प्रदर्शन जारी है। लेकिन, मंगलवार रात राजस्थान विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में बनी पानी की टंकी पर दो छात्रों के चढ़ने से माहौल गरमा गया। छात्र नेता विनोद भूदोली और कमल चौधरी करीब 5 घंटे तक पानी की टंकी पर पेट्रोल की बोतल लेकर बैठे रहे।
सूचना मिलते ही एडिशनल पुलिस कमिश्नर कुंवर राष्ट्रदीप पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों छात्रों को काफी समझाने का प्रयास किया। लेकिन, दोनों छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे। ऐसे में सिविल डिफेंस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। सुरक्षा की दृष्टि से पानी की टंकी के नीचे जाल लगाया गया। देर रात तक पुलिस के आलाधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।
पुलिस के आलाधिकारी पानी की टंकी से छात्र नेताओं से नीचे उतरने की अपील करते रहे। इस दौरान मौके पर छात्र छात्राओं की भारी भीड़ जमा हो हो गई। हालांकि, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल से फोन पर बात के बाद दोनों छात्र टंकी से नीचे उतरने को तैयार हो गए। इसके बाद करीब एक बजे दोनों छात्र पानी की टंकी से नीचे उतरे।
और प्रियांशी खंडेलवाल को तबीयत बिगड़ने के बाद एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, चार छात्र नेता आज भी भूख हड़ताल पर बैठे हुए है। हड़ताल पर बैठे नेताओं की मांग है कि सरकार अपना फैसला वापस ले और राजस्थान में इस साल छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं। जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी, तब तक सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा।
…इसलिए लगी छात्रसंघ चुनाव पर रोक
बता दें कि गहलोत सरकार ने शनिवार देर रात मौजूदा 2023-24 के शैक्षणिक सत्र में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराने का फैसला लिया था। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से देर रात सभी कुलपतियों व उच्चाधिकारियों की मीटिंग हुई थी। बैठक में कुलपतियों ने विद्यार्थियों के छात्रसंघ चुनावों में धनबल एवं भुजबल का खुलकर प्रयोग करने तथा लिंगदोह समिति की सिफारिशों का उल्लंघन होने की स्थिति स्पष्ट की थी। जिस पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के उल्लंघन का हवाला देते हुए छात्रसंघ नहीं कराने का फैसला लिया गया था। इसके बाद से ही छात्र नेता लामबंद है और गहलोत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।