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12 घँटे बिजली रही गुल,BKESL के कर्मचारियों को फॉल्ट खोजने में आया पसीना, संसाधनो की कमी आई नजर

 
THE BIKANER NEWS:- बीकानेर 17 जुलाई:- बीकानेर में कल मंगलवार शाम को करीब 5 बजे शहर के कई इलाकों में लाइट चली गईं जिसका निवारण आज सुबह करीब 5 बजे के आसपास हुआ वो भी पूरी तरह से नही । आम जनता को करीब 12 घँटे बिना बिजली के रात गुजारनी पड़ी। शहर के नत्थूसर गेट और जस्सूसर गेट इलाके में भूमिगत केबल लाइन में कही फॉल्ट हो गया था। जिसको ढूंढने के लिए BKESL कंपनी के अधिकारी और उनके कार्मिक पूरे शहर में भागते रहे मगर फॉल्ट मिलने का नाम ही नही ले रहा था। क्यों कि निजी कंपनी के पास ऐसे संसाधनों की कमी नज़र आई जिस से चंद मिनटों में फॉल्ट का पता लग जाए। साथ ही कंपनी ने बीकानेर के उन कर्मचारियों को नजर अंदाज किया है जिनको बीकानेर में कहा पर कोनसी भूमिगत केबल लाइन है और कहा पर कौनसा बिजली का यंत्र लगा है जिसे फॉल्ट ढूंढने में आसानी रहे  सब पता है। लेकिन कंपनी ने तो मुनाफे के चक्कर में बाहर से ऐसे लोगो को काम पर लगा रखा है जो फॉल्ट तो क्या बीकानेर की गलियों का रास्ता भी लोगो से पूछकर ही आगे बढ़ते है जिसका खामियाज़ बीकानेर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। खेर काफी मशक्कत करते करते आखरी उनको समझ आया कि रघुनाथ मंदिर के पास भूमिगत केबल में फॉल्ट है। कार्मिको ने जमीन को खोदने का काम शुरू किया लेकिन वहां भी संसाधनों की कमी नज़र आई क्यों कि केबल लाइन जमीन के करीब 10 फुट अंदर तक थी। आनन फानन में JCB बुलाई और गड्ढा खोदने का काम फिर शुरू हुआ। तब तक जनता का धैर्य जबाब दे चुका था और जनता ने स्थानीय विधायक व्यास और निजी बिजली कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ सड़क पर टायर जलाकर विरोध करना शुरू कर दिया और मुर्दाबाद के नारे लगने लगे। आखिर कार सुबह 5 बजे के आसपास समस्या का समाधान हुआ है लेकिन देखना है कि ये स्थायी है या फिर से बिजली कटौती होगी। निजी बिजली कंपनी जनता से बिजली के सरचार्ज, रखरखाव, आदि ऐसे कई चार्ज वसूलती है लेकिन सुविधा के नाम पर अभी भी जनता अपने आप को ठगा महसूस कर रही है। लाखो रुपये की सेलेरी देकर बड़े बड़े इंजीनियर रखती है लेकिन जब समस्या आती है तो उनको भी कुछ समझ नही आता। जनता अगर अपना बिजली का बिल एक दिन लेट जमा कराती है तो उनपर जुर्माना वसूला जाता है लेकिन जब 12 से 15 घँटे बेवजह लाइट चली जाती है तो अधिकारी अपना फोन बंद कर के गहरी नींद में सो जाते है। और जब जनता परेशान होकर विरोध करती है तो उनको कानूनी कार्यवाही झेलनी पड़ती है। आखिर कब तक?