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प्रशासनिक अनदेखी: हिम्मटसर में आंगनबाड़ी भवन के लिए तरसते नौनिहाल, मुआवजे के लिए भटकता अग्नि पीड़ित परिवार

 

THE BIKANER NEWS:;नोखा/बीकानेर। ग्राम पंचायत हिम्मटसर में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर के दौरान प्रशासनिक अनदेखी और लंबित मामलों की तस्वीर सामने आई। एक ओर आंगनबाड़ी केंद्र के नौनिहाल सुरक्षित भवन और मूलभूत सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं, तो दूसरी ओर आगजनी से सब कुछ गंवा चुका एक परिवार एक साल से अधिक समय से सरकारी सहायता की बाट जोह रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्र-02 के लिए भूमि आवंटन लंबित
हिम्मटसर के मेघवालों के दक्षिण मोहल्ले में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र-02 के लिए भूमि आवंटन का मामला लंबे समय से अटका हुआ है। समेकित बाल विकास सेवाएं (ICDS) निदेशालय, जयपुर की ओर से सरकारी भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को ICDS विभाग के नाम आवंटित या हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बिजली, पानी, शौचालय और मरम्मत जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
बताया गया कि बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) नोखा ने अगस्त 2025 में सरपंच को 40×60 फीट निशुल्क भूमि उपलब्ध करवाने के लिए पत्र लिखा था। ग्रामीणों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कमला नायक का आरोप है कि संबंधित आदेशों के बावजूद वर्तमान सामुदायिक भवन के पीछे उपलब्ध करीब 41×75 फीट सरकारी भूमि का आवंटन नहीं किया जा रहा है।
भूमि आवंटन नहीं होने के कारण बच्चों के लिए नए भवन का निर्माण अटका हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र पर पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी जरूरत है। उन्होंने उच्च स्तर से भवन निर्माण की स्वीकृति जारी करवाने और भूमि आवंटन प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की है।
आग में सब कुछ गंवाया, अब मुआवजे का इंतजार
ग्रामीण सेवा शिविर में हिम्मटसर निवासी शिवनारायण नायक का परिवार भी अपनी पीड़ा लेकर पहुंचा। परिवार की ढाणी में 15 मार्च 2025 को अज्ञात कारणों से आग लग गई थी। हादसे में झोपड़ी सहित घरेलू सामान, नकदी, बिस्तर, अनाज, बर्तन और जरूरी कागजात जल गए। हादसे में एक गाय की भी मौत हो गई।
परिवार के अनुसार आग की घटना के बाद पंचायत प्रतिनिधि और हल्का लेखपाल मौके पर पहुंचे थे। नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तैयार करने और दैवीय आपदा राहत कोष से सहायता दिलाने का आश्वासन दिया गया था। परिवार का कहना है कि इसके बाद जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में भी प्रार्थना-पत्र दिया गया, लेकिन अब तक आर्थिक सहायता या आवास उपलब्ध नहीं कराया गया।
ग्रामीणों ने प्रशासन से दोनों मामलों में तत्काल कार्रवाई की मांग की है। एक ओर छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित आंगनबाड़ी भवन की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर आगजनी से प्रभावित परिवार को नियमानुसार राहत और आवास सहायता मिलने का इंतजार है।