प्रशासनिक अंधेरगर्दी: बीकानेर CMHO से जयपुर निदेशालय तक गहरी नींद में सिस्टम,फर्जीवाड़े के आरोप!
जयपुर निदेशालय की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
यह पूरा मामला सहायक लैब टेक्नीशियन किशन गोपाल छंगाणी के दस्तावेजों से जुड़ा है। आरोप है कि वर्ष 2018 में जो अनुभव प्रमाण-पत्र जारी किया गया था, उसमें भारी विसंगतियां और फर्जीवाड़ा था। हैरानी की बात यह है कि जब 2019 में ये दस्तावेज जांच के लिए निदेशालय (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, जयपुर) के समक्ष पहुंचे, तो वहां बैठे उच्च अधिकारियों ने भी बिना किसी गहन पड़ताल के इन्हें 'क्लीन चिट' दे दी। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग में नीचे से लेकर ऊपर तक 'दस्तावेज सत्यापन' महज एक कागजी औपचारिकता बनकर रह गया है।
आरटीआई के खुलासे: विभाग के पास नहीं है कोई जवाब
आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेजों ने इस पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। दस्तावेजों से निम्नलिखित गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं:
- अवैध अनुबंध: फाइलों में ऐसे अनुबंध संलग्न हैं जिन पर प्रथम पक्षकार (कर्मचारी) के हस्ताक्षर ही नहीं हैं। कर्मचारी के स्थान पर चिकित्सा अधिकारी (प्रभारी) हस्ताक्षर कर रहे हैं और विभाग ने इन्हें वैध भी मान लिया है।
- फर्जी हस्ताक्षर का अंदेशा: प्लेसमेंट एजेंसी द्वारा दिए गए नियुक्ति पत्र में कोई रेफरेंस नंबर (संदर्भ संख्या) मौजूद नहीं है। इसके अलावा, प्लेसमेंट एजेंसी और एनजीओ द्वारा जारी अनुभव प्रमाण-पत्रों पर किए गए हस्ताक्षर आपस में मेल नहीं खा रहे हैं। हस्ताक्षरों में यह भिन्नता किसी बड़े घालमेल की ओर इशारा करती है।
- गायब रिकॉर्ड: कर्मचारी की निरंतर सेवाओं के बावजूद वर्ष 2013 से अनुबंध के रिकॉर्ड ही गायब कर दिए गए हैं। रिकॉर्ड संधारण में विभाग पूरी तरह विफल रहा है और बीकानेर सीएमएचओ आज दिनांक तक इन अनुभव प्रमाण-पत्रों में सुधार करने की कोई मंशा नहीं दिखा रहे हैं।
न्याय के लिए अब आर-पार की लड़ाई की चेतावनी
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बीकानेर सीएमएचओ कार्यालय की संस्थापन शाखा और जयपुर निदेशालय के अधिकारी अपनी इस 'हिमालयी भूल' को स्वीकार करेंगे? आरटीआई के प्रमाणित दस्तावेजों को दरकिनार करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह एक कर्मचारी के करियर और भविष्य के साथ जानबूझकर किया जा रहा खिलवाड़ है।
प्रार्थी ने विभाग को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि बीकानेर सीएमएचओ ने अपनी पिछली गलतियों को सुधारते हुए, आरटीआई दस्तावेजों के आधार पर तत्काल संशोधित अनुभव प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया, तो इस पूरे तंत्र (बीकानेर से जयपुर तक) के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। साथ ही, उच्च स्तरीय जांच एजेंसियों से भी इसकी शिकायत की जाएगी।
अब देखना यह है कि क्या राज्य सरकार उन लापरवाह अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई करेगी, जिन्होंने बिना पढ़े-देखे दस्तावेजों को सत्यापित कर सिस्टम का मजाक बना दिया है?