वीर तेजाजी लिफ्ट नहर परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोप: डिग्गियों में दरारें, पानी हो रहा लीक
Jun 16, 2026, 18:39 IST
THE BIKANER NEWS:-बीकानेर (बज्जू)इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत वीर तेजाजी लिफ्ट नहर परियोजना में फव्वारा पद्धति के लिए बनाई गई डिग्गियों (जल हौजों) के निर्माण में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। किसानों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल से नई डिग्गियों की दीवारों में दरारें आ गई हैं, जिससे सिंचाई के लिए पानी नहीं रुक रहा है। इस संबंध में बज्जू खालसा के एक जागरूक किसान ने मुख्य अभियंता को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता किसान मांगीलाल कड़वासरा (निवासी ग्राम- बज्जू खालसा, तहसील- बज्जू) ने 4 जून 2026 को इंदिरा गांधी नहर परियोजना, राजस्थान के मुख्य अभियंता को एक लिखित शिकायत भेजी है। पत्र में बताया गया है कि वीर तेजाजी लिफ्ट नहर परियोजना के अंतर्गत बनी डिग्गियों की हालत बेहद खराब है।
शिकायत के मुख्य बिंदु:
- घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग: डिग्गियों के निर्माण में बेहद निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसके कारण कई डिग्गियों की दीवारों में स्पष्ट दरारें और क्षति दिखाई दे रही है।
- पानी का भारी रिसाव: डिग्गियों में पानी भरने के पश्चात जल स्तर लगातार कम हो रहा है। पानी रिसकर या सूखकर खत्म हो जाता है।
- सिंचाई का संकट: पानी के रिसाव के कारण किसानों को फव्वारा पद्धति से सिंचाई करने हेतु पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
- सरकारी धन का दुरुपयोग: इस स्थिति ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं और इसमें सरकारी धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
किसानों ने उठाई यह मांगें:
पत्र के माध्यम से प्रशासन से निम्नलिखित कार्रवाई की गुहार लगाई गई है:
- पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच करवाई जाए।
- निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री के सैंपल लेकर उसकी गुणवत्ता परखी जाए।
- इस लापरवाही और भ्रष्टाचार में लिप्त दोषी ठेकेदारों एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
- किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए, क्षतिग्रस्त और दोषपूर्ण डिग्गियों की तुरंत मरम्मत या पुनर्निर्माण करवाया जाए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सिंचाई विभाग और प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर कितनी तत्परता से संज्ञान लेता है और पीड़ित किसानों को कब तक राहत मिल पाती है।