बीकानेर स्वास्थ्य विभाग में रिकॉर्ड हेराफेरी के आरोप,उच्चस्तरीय जांच की मांग
THE BIKANER NEWS:-
बीकानेर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग बीकानेर में प्रयोगशाला सहायक भर्ती-2018 से जुड़े एक मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सहायक प्रयोगशाला तकनीकीविद् किशन गोपाल छंगाणी ने विभागीय अभिलेखों में कथित विसंगतियों, अनुभव प्रमाण-पत्रों में अंतर और सेवा संबंधी रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायत अब राजस्थान सरकार के सम्पर्क पोर्टल के माध्यम से संबंधित एजेंसियों तक पहुंच चुकी है।
पीड़ित ने संभागीय आयुक्त बीकानेर को ई-मेल के जरिए विभिन्न दस्तावेज भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अनुभव प्रमाण-पत्रों में अंतर पर उठे सवाल
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2018 में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) बीकानेर द्वारा जारी अनुभव प्रमाण-पत्र में किशन गोपाल छंगाणी का अनुभव 4 वर्ष 10 माह 22 दिन दर्शाया गया था, जिसे संयुक्त निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, बीकानेर क्षेत्र द्वारा सत्यापित भी किया गया था।
वहीं, आरटीआई के तहत वर्ष 2026 में उपलब्ध करवाई गई सूचना के साथ संलग्न एक पत्र में उनका अनुभव 1 वर्ष 10 माह 27 दिन बताया गया। इसी अंतर को लेकर शिकायतकर्ता ने अभिलेखों में संभावित गड़बड़ी का आरोप लगाया है और इसकी जांच की मांग की है।
नियुक्ति और सेवा रिकॉर्ड पर भी सवाल
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति से जुड़े कुछ दस्तावेजों में आवश्यक प्रेषण संख्या एवं संदर्भ संख्या का उल्लेख नहीं है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस संबंध में विभाग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
इसके अलावा, विभिन्न विभागीय पत्राचार का हवाला देते हुए यह सवाल भी उठाया गया है कि यदि किसी कर्मचारी का अनुबंध निर्धारित अवधि के लिए था, तो उसके बाद सेवाएं किस आधार पर जारी रखी गईं।
स्थायी कर्मचारी होने का दावा
किशन गोपाल छंगाणी का दावा है कि वे बिना किसी सेवा-भंग और बिना नए अनुबंध के नियमित रूप से सेवाएं देते रहे तथा उन्हें स्थायी कर्मचारी के रूप में माना जाना चाहिए। उनका आरोप है कि उनके सेवा रिकॉर्ड से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, जिससे उनकी वास्तविक स्थिति प्रभावित हो रही है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने संभागीय आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, रिकॉर्ड की सत्यता की जांच करने तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
फिलहाल विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की सत्यता और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।