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बीकानेर सुनहरी कलम पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित 

 

बीकानेर की कला ओर संस्कृति में सुनहरी कलम को जीवंत करने के लिए राम कुमार भादाणी के अथक प्रयासों को एक बार फिर से सराहना मिली है।  इस हेतु राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, बीकानेर द्वारा आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण शाला में बीकानेर की सुनहरी कलम (बीकानेर उस्ता क्राफ्ट कला) विषय में वनस्थली  विद्यापीठ निवाई  विश्विद्यालय के  पीएचडी,  के  शोधार्थियों ने भाग लिया। 

इस कार्यक्रम का उद्देश्य बीकानेर की पारंपरिक सुनहरी कलम कला को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी को इस कला के प्रति जोड़ना तथा कला कि बारीकियों के बारे में जानकरी से अवगत करना मुख्य में रहा। 
भादाणी ने बताया कि ईरान से होती मुग़ल दरबार ओर फिर बीकानेर केदरबार पहुंची। बीकानेर छठे राजा राय सिंह के दरबार में फली फूळी सुनहरी मनोवती कला  जिसमें आए कलाकारों को उस्तादों के नाम पहचान मिली।  कालांतर में उस्ताद का  शब्द का द शब्द लुप्त होते ये उस्ता नाम से प्रख्यात हुई।  जिस कारण इसे उस्ता कला भीं कहा जाता है। मुख्य रूप से उस्ता कला ऊंट कि खाल पर कि गयी सुनहरी कलम मनोवत के कार्य को कहा जाता है। 
समय के परिवर्तन होने पर आज कलाकार ऐसे लकड़ी लोहे कांच व अन्य सरफेश पर भीं किया जा सकता है।  कला के प्रति रूचि  रखने वाले शोधार्थियों को पारंपरिक तरीके से होने वाले कार्य जिसमे डिजाइन बनाना, मनोवत करना, सोने के वर्क लगना, ओर स्याही करना, रंगों का संयोजन करना आदि जैसे कार्य सेली से पूर्ण अवगत कररवाया।   
डॉ नितिन गोयल,  के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यशाला में शोधार्थी ने सुनहरी कलम की विभिन्न तकनीकों को सीखा और अपने अनुभव साझा किए। यह कार्यक्रम बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और नई पीढ़ी को इस कला से जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यशाला में पीएचडी के शोधर्थी कनक सिंह , दिशा वसिष्ठ , अपर्णा त्रिपाठी ,अंकिता कौशिक ,पीहू पांडे , निवेदिता गुप्ता , दीक्षा रानी , रिया दम्मानी   ने   उत्साह  पूर्वक भाग लिया/ शोधार्थियों ने इस कला की अभिवृद्धि हेतु राजकीय एवं व्यक्तिगत प्रयासों को जाना,  कार्यशाला के समापन पर चित्रकार राम कुमार भादाणी को ओपर्णा ओढ़ाकर, पर्यावरण संरक्षण स्वररूप पोध व संस्थान का प्रतीक चिन्ह स्वरूप देकर सामान किया गया। इससे पूर्व भादाणी देशी व विदेशी कला शोधार्थियों को सुनहरी कलम की बारीकीयों से रूबरू करवा कर इसे जीवनत्ता के लिए 
अथक प्रयासरत रहे है।