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बीकानेर: 4000 बीघा में लग रहे सोलर प्लांट के लिए हजारों 'खेजड़ी' पेड़ों की अवैध कटाई, जीव रक्षा संस्था ने खोला मोर्चा

 

THE BIKANER NEWS:-रबीकानेर (राजस्थान)। राजस्थान के राज्य वृक्ष 'खेजड़ी' के संरक्षण को लेकर जहाँ एक तरफ राज्य सरकार कड़े कानून बनाने और अवैध कटाई पर सख्त कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बीकानेर जिले में सोलर कंपनियों द्वारा हजारों खेजड़ी वृक्षों को बेरहमी से काटे जाने का एक बड़ा मामला सामने आया है।

जीव रक्षा संस्था, बीकानेर के अध्यक्ष मोखराम बिश्नोई ने छत्तरगढ़ के केला ग्राम पंचायत में आयोजित प्रशासन के कैंप कोर्ट में उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक लिखित शिकायत सौंपकर इस अवैध कटाई के खिलाफ तुरंत कड़ी कानूनी कार्रवाई और मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

​क्या है पूरा मामला?

​शिकायत के अनुसार, छत्तरगढ़ क्षेत्र के केला/नापसरिया से केला रावलपुरा की रोही में लगभग 4000 बीघा भूमि पर एक विशाल सोलर पावर प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। आरोप है कि सेरितिका, संसोहर सोलर कंपनी वेयर सांचौर इराक जैसी कंपनियों द्वारा ठेकेदारों, एरिया मैनेजरों और वन माफिया के साथ मिलकर पिछले कई दिनों से हजारों की संख्या में राज्य वृक्ष खेजड़ी को अवैध रूप से काटा जा रहा है।

​शिकायत में मुख्य रूप से निम्नलिखित गंभीर तथ्य उजागर किए गए हैं:

  • सबूत मिटाने के लिए जेसीबी से दफनाए जा रहे पेड़: सोलर कंपनी के परिसर में काटे गए खेजड़ी के हरे पेड़ों को साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से जेसीबी मशीनों द्वारा जमीन में दबाया जा रहा है।
  • पर्यावरण और वन्यजीवों को भारी नुकसान: हजारों खेजड़ी के पेड़ कटने से क्षेत्र के वन्यजीवों का प्राकृतिक आश्रय नष्ट हो गया है, पक्षियों के घोंसले उजड़ गए हैं और वन विभाग द्वारा पूर्व में बनाए गए जल स्रोत भी नष्ट कर दिए गए हैं।
  • चोरी-छिपे परिवहन: काटे गए पेड़ों को मौके से गायब कर चोरी-छिपे ठिकाने लगाया जा रहा है।

​सरकारी आदेशों की खुलेआम अवहेलना

​दिलचस्प बात यह है कि राजस्व विभाग (ग्रुप-6), राजस्थान सरकार के शासन सचिव डॉ. जोगा राम द्वारा 12 फरवरी 2026 को ही एक आधिकारिक आदेश (क्रमांक: F.7(1)rev-6/2016pt/3) जारी कर सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया गया था कि प्रदेश में खेजड़ी के संरक्षण और अवैध कटाई को रोकने के लिए सरकार पूर्णतः संकल्पित है और इसके लिए अतिशीघ्र एक विशेष कानून भी लाया जा रहा है। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे इन आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

​जीव रक्षा संस्था ने की ये चार बड़ी मांगें:

​संस्था के अध्यक्ष मोखराम बिश्नोई ने प्रशासन से निम्नलिखित बिंदुओं पर तुरंत एक्शन लेने की गुहार लगाई है:

  1. सोलर प्रोजेक्ट पर रोक: कानून का उल्लंघन करने वाली सोलर कंपनी को तत्काल प्रभाव से सील किया जाए और काम रोका जाए।
  2. मुकदमा दर्ज हो: वन माफिया, पेड़ काटने वाले ठेकेदारों और सोलर कंपनी के खिलाफ वन्य जीव अधिनियम व अन्य सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज हो।
  3. मशीनें और गाड़ियां हों जब्त: अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जा रही जेसीबी, कटर मशीन, ट्रैक्टर, ट्रॉलियां और पिकअप गाड़ियों को तुरंत जब्त कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए।
  4. दबाए गए पेड़ों को निकाला जाए: जमीन में छुपाकर दबाए गए खेजड़ी के पेड़ों को प्रशासन खुद खुदवाकर बाहर निकाले ताकि उन्हें कोर्ट में साक्ष्य (सबूत) के रूप में पेश किया जा सके।

​इस शिकायत की प्रतिलिपियां संभागीय आयुक्त बीकानेर, मुख्य वन संरक्षक, जिला कलेक्टर बीकानेर और पुलिस अधीक्षक (SP) बीकानेर को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर पर्यावरण अपराध पर क्या रुख अपनाता है।