बाल संरक्षण एवं बाल अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला स्तरीय समीक्षा बैठक भ्रायोजित
THE BIKANER NEWS:- दिनांक: 22 जून, 2026, बीकानेर। अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट श्रीमान् उम्मेद सिंह रत्नू की अध्यक्षता में सोमवार को बाल संरक्षण एवं बाल अधिकारों से सम्बन्धित विभिन्न विषयों की समीक्षा हेतु जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में सहायक निदेशक, बाल अधिकारिता विभाग श्री अरूण सिंह शेखावत, किशोर न्याय बोर्ड सदस्य श्री अरविन्द सिंह सेंगर एवं श्रीमती किरण गौड़, बाल कल्याण समिति सदस्य श्री जन्मेजय व्यास एवं हाजरा बानो, राजकीय सम्प्रेक्षण गृह अधीक्षक श्री रामनारायण विश्नोई, बालिका गृह परिवीक्षा अधिकारी श्री सुरेन्द्र कुमार, चाईल्ड हेल्प लाइन समन्वयक श्री प्रवेश आचार्य सहित सम्बन्धित अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट महोदय ने जिले में संचालित बाल गृहों के नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संस्थागत देखभाल में रह रहे बच्चों को सुरक्षित, संवेदनशील एवं गुणवत्तायुक्त वातावरण उपलब्ध करवाना सभी सम्बन्धित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने चाईल्ड हेल्प लाइन को 24×7 अलर्ट मोड पर कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्राप्त होने वाली प्रत्येक कॉल एवं शिकायत पर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए तथा प्रकरणों का प्रभावी फॉलोअप किया जाए, जिससे संकटग्रस्त बच्चों को समय पर सहायता उपलब्ध हो सके।
बैठक में मानव तस्करी विरोधी प्रकोष्ठ को भी निर्देशित किया गया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित "उमंग-7 अभियान" के तहत प्राप्त होने वाले मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए तथा विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान को सफल बनाया जाए।
कार्यक्रम के अन्त में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट द्वारा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 पर आधारित पुस्तक "बचपन अनफिल्टर्ड" का विमोचन किया गया। यह पुस्तक बाल अधिकारिता विभाग, बीकानेर के वरिष्ठ सहायक श्री पवन कुमार पूनिया द्वारा तैयार की गई है। पुस्तक में किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के विभिन्न प्रावधानों को सरल एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे बाल संरक्षण से जुडे अधिकारियों, कार्मिकों एवं आम जन को उपयोगी जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने पुस्तक के प्रकाशन पर खुशी जाहिर करते हुए इसे बाल अधिकारों एवं बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक उपयोगी पहल बताया।