मनरेगा का स्वरूप बदलने और 'राइट टू वर्क' खत्म करने के विरोध में गरजे डॉ. बी.डी. कल्ला, केंद्र सरकार पर साधा निशाना
नाम बदला और भ्रम फैलाया
डॉ. कल्ला ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना' (मनरेगा) का नाम बदलकर अब 'विकसित भारत गारंटी फोर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)' कर दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस नए नाम में कहीं भी 'राम' का नाम नहीं है, लेकिन एब्रीविएशन (संक्षिप्त नाम) के जरिए ग्रामीण जनों में भ्रम फैलाया जा रहा है।
'राइट टू वर्क' का अधिकार समाप्त
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने केवल योजना का नाम ही नहीं बदला, बल्कि इसकी मूल भावना पर भी प्रहार किया है। पूर्व में इस योजना के तहत आमजन को मिला 'काम करने का अधिकार' (Right to Work) और रोजगार की कानूनी गारंटी को नए विधेयक के जरिए समाप्त कर दिया गया है।
राज्यों पर डाला गया आर्थिक बोझ
डॉ. कल्ला ने आंकड़ों के जरिए समझाया कि पुराने विधेयक में संशोधन करके फंडिंग पैटर्न को पूरी तरह बदल दिया गया है।
- पहले: राज्यों को केंद्र सरकार से शत-प्रतिशत (100%) राशि मिलती थी।
- अब: नए नियमों के अनुसार केंद्र केवल 60% राशि देगा, जबकि 40% राशि राज्यों को अपने बजट से जुटानी होगी।
- राजस्थान पर असर: उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि पहले राजस्थान को औसतन 6000 करोड़ रुपये मिलते थे। अब नए नियम के तहत राजस्थान सरकार को पहले अपने हिस्से के 2400 करोड़ रुपये जुटाने होंगे, तभी केंद्र अपनी तरफ से 3600 करोड़ रुपये देगा। यदि राज्य अपना हिस्सा नहीं दे पाया, तो केंद्र भी बजट रोक देगा। इसका व्यापक असर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और बंगाल जैसे राज्यों के विकास पर पड़ेगा।
ग्राम सभाओं के अधिकार छीने
डॉ. कल्ला ने बताया कि पहले मनरेगा के तहत कौन-से कार्य स्वीकृत होंगे, इसका निर्णय ग्राम सभाओं में होता था। लेकिन अब आधारभूत ढांचे के संबंध में सारे निर्णय भारत सरकार स्वयं करेगी। इससे ग्रामीण जनों और स्थानीय निकायों के अधिकारों को समाप्त कर दिया गया है।
पोस्टकार्ड भेजकर विरोध का आह्वान
डॉ. कल्ला ने जन-जागरण पर जोर देते हुए आमजन से अपील की कि वे राष्ट्रपति महोदया और केंद्र सरकार को पोस्टकार्ड भेजकर इस विधेयक का विरोध करें और मनरेगा को उसके पुराने स्वरूप में रखने की मांग करें।
ये रहे उपस्थित
इस कार्यक्रम में ब्लॉक अध्यक्ष जाकिर नागौरी, ओबीसी जिलाध्यक्ष उमा सुथार, मंडल अध्यक्ष मुकेश जोशी, पूर्व पार्षद हसन अली गौरी, तोलाराम सियाग, मुनीराम कूकना, पार्षद शिव नारायण सोनी, नरसी सोनी, मेघराज सुथार, पूर्व पार्षद विनोद सुथार, गोवर्धन कड़वासरा, मंडल अध्यक्ष नंदराम गोदारा, उदाराम सारस्वत, ओम कुमार, मंडल उपाध्यक्ष लक्ष्मण प्रजापत, अजित प्रजापत, चिराग अली, खीर दिन, रामेश्वर सुथार, सौरभ जोशी, पवन सुथार, कपिल व्यास, नवरत्न व्यास सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।