नवदुर्गा स्वरूप में सजी बालिकाएं, घुड़ले की परंपरा में गूंजे आस्था और संस्कृति के स्वर*
Mar 20, 2026, 21:28 IST
THE BIKANER NEWS:-बीकानेर:-नत्थूसर बास रामदेव पार्क के पास भाटोलाई तलाई में गवरजा माता के पावन उत्सव के उपलक्ष्य में घुड़ले घुमाने की प्राचीन एवं लोकआस्था से जुड़ी परंपरा इस वर्ष भी अत्यंत भव्य, श्रद्धामयी एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई। इस अवसर पर मोहल्ले की नौ बालिकाओं ने नवदुर्गा के दिव्य स्वरूप धारण कर सम्पूर्ण क्षेत्र को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।
बालिकाओं ने क्रमशः मां शैलपुत्री देवांशी, ब्रह्मचारिणी दिव्या, चंद्रघंटा चेतना, कूष्मांडा भावना, स्कंदमाता प्रगति, कात्यायनी, कालरात्रि यश्वी, महागौरी युक्ति एवं सिद्धिदात्री हार्दिका एवं महालक्ष्मी वान्या के रूप एवं अन्य देवी के रूपों में सुसज्जित होकर अद्वितीय आस्था एवं सांस्कृतिक समर्पण का परिचय दिया। पारंपरिक परिधानों, मनमोहक श्रृंगार एवं जीवंत भाव-भंगिमाओं के साथ उनकी प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
ढोल-नगाड़ों की गूंज, मंगल ध्वनियों और "जय माता दी" के उद्घोषों के बीच बालिकाओं ने पूरे मोहल्ले में भ्रमण करते हुए घर-घर जाकर पारंपरिक घुड़ले के गीत गाए। हर आंगन में उनका स्वागत हुआ, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय एवं उत्सवी रंग में रंग गया।
स्थानीय निवासियों ने इस आयोजन को सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल बताते हुए बालिकाओं के उत्साह और समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और लोक परंपराओं को सहेजने का एक सशक्त संदेश भी दे गया।इस मौके पर सामूहिक गीत चित्रा,आयुषी,संतोष,कोमल,प्रिंसी, वर्षा,संजना, मीनाक्षी आदि रहे।
बालिकाओं ने क्रमशः मां शैलपुत्री देवांशी, ब्रह्मचारिणी दिव्या, चंद्रघंटा चेतना, कूष्मांडा भावना, स्कंदमाता प्रगति, कात्यायनी, कालरात्रि यश्वी, महागौरी युक्ति एवं सिद्धिदात्री हार्दिका एवं महालक्ष्मी वान्या के रूप एवं अन्य देवी के रूपों में सुसज्जित होकर अद्वितीय आस्था एवं सांस्कृतिक समर्पण का परिचय दिया। पारंपरिक परिधानों, मनमोहक श्रृंगार एवं जीवंत भाव-भंगिमाओं के साथ उनकी प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
ढोल-नगाड़ों की गूंज, मंगल ध्वनियों और "जय माता दी" के उद्घोषों के बीच बालिकाओं ने पूरे मोहल्ले में भ्रमण करते हुए घर-घर जाकर पारंपरिक घुड़ले के गीत गाए। हर आंगन में उनका स्वागत हुआ, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय एवं उत्सवी रंग में रंग गया।
स्थानीय निवासियों ने इस आयोजन को सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल बताते हुए बालिकाओं के उत्साह और समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और लोक परंपराओं को सहेजने का एक सशक्त संदेश भी दे गया।इस मौके पर सामूहिक गीत चित्रा,आयुषी,संतोष,कोमल,प्रिंसी, वर्षा,संजना, मीनाक्षी आदि रहे।