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कितनी खुश है बीकानेर की जनता BKESL (निजी बिजली कंपनी) के बीकानेर में आने से? दिलीप व्यास

 
THE BIKANER NEWS:-15 मई 2017 तक बीकानेर में बिजली व्यवस्था सरकारी तंत्र के अधीन थी। उस समय आम जनता की शिकायतों का स्थानीय स्तर पर समाधान किया जाता था। किसी मोहल्ले या गांव की बिजली बंद होने पर विभागीय कर्मचारी तुरंत सुनवाई कर समस्या के निस्तारण का प्रयास करते थे।

लेकिन निजीकरण के बाद जनता को बेहतर सुविधाओं के जो सपने दिखाए गए थे, आज वे धरातल पर दिखाई नहीं देते। बीकानेर की भोली-भाली जनता आज बिजली व्यवस्था से परेशान नजर आ रही है।

आज स्थिति यह है कि घंटों तक बिजली बंद रहती है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं। कई बार शिकायत दर्ज तक नहीं होती। आम उपभोक्ताओं के पास संबंधित कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता अथवा जिम्मेदार अधिकारियों के संपर्क नंबर तक उपलब्ध नहीं हैं। रात के समय बिजली चली जाए तो कई घंटों तक तो  तक इंतजार करना पड़ता है।

पहले क्षेत्रीय कार्यालय नजदीक होने से जनता को सुविधा रहती थी, लेकिन अब बिजली से संबंधित कार्यों — जैसे नया कनेक्शन, बिल संशोधन, नाम परिवर्तन अथवा अन्य समस्याओं — के लिए दूर स्थित सीमित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे आम नागरिकों, बुजुर्गों एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

किसी भी सरकारी या निजी व्यवस्था का उद्देश्य जनता को बेहतर और सुलभ सेवाएं देना होना चाहिए, लेकिन यदि व्यवस्था के कारण आम आदमी परेशान हो, शिकायतों का समाधान समय पर न हो और संपर्क व्यवस्था कमजोर हो जाए, तो जनता के मन में असंतोष स्वाभाविक है।

बीकानेर की जनता आज यही सवाल पूछ रही है —
"क्या निजीकरण से वास्तव में बिजली व्यवस्था में सुधार हुआ, या आम उपभोक्ता की परेशानियां और बढ़ गईं?"

दिलीप व्यास
भारतीय मजदूर संघ बीकानेर