अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पुलिस पर लगे गंभीर आरोप
क्या है पूरा मामला?
अधूरी गांव निवासी विधवा महिला इंदिरा देवी पिछले एक साल से एक जमीन विवाद को लेकर कोर्ट के चक्कर काट रही थीं। हाल ही में कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें अपने प्लाट पर मकान बनाने का आदेश दिया था। कोर्ट का आदेश मिलने के बाद इंदिरा देवी ने अपने आशियाने का निर्माण कार्य शुरू करवाया।
बिना महिला पुलिस और बिना स्टे ऑर्डर के पहुंची पुलिस
स्थानियो के
आरोप है कि 8 मार्च को विपक्षी पार्टी की मिलीभगत से पूगल पुलिस थाने के तीन कांस्टेबल मौके पर पहुंच गए। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान उनके साथ कोई महिला कांस्टेबल मौजूद नहीं थी। पुलिसकर्मियों ने बिना किसी पूर्व सूचना, बिना किसी पक्के सबूत और बिना किसी स्टे ऑर्डर के ही जबरन निर्माण कार्य रुकवाने की धमकी दी।
साथ ही शराब के नशे में मारपीट और सबूत मिटाने की कोशिश
जब पीड़िता ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए काम बंद करने से मना किया, तो पुलिसकर्मी मारपीट पर उतारू हो गए। मौके पर मौजूद करीब 10-12 प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तीन में से दो पुलिसकर्मी शराब के नशे में थे। पुलिस की इस गुंडागर्दी का वीडियो न बन सके और सारे सबूत नष्ट हो जाएं, इसके लिए पुलिसकर्मियों ने जाते-जाते पीड़िता का मोबाइल फोन भी छीन लिया।
दीवानी मामले में पुलिस का अवैध दखल
कानून के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि जमीन विवाद मुख्य रूप से एक दीवानी (Civil) मामला होता है। दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 145 (अब नए कानून BNSS की धारा 164) के तहत बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के पुलिस सीधे तौर पर ऐसे मामलों में दखल नहीं दे सकती। लेकिन यहां पुलिस ने अपने अधिकारों और वर्दी का दुरुपयोग करते हुए खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई हैं।
गरीब की कोई सुनवाई नहीं?
इस घटना ने व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। चार छोटे बच्चों को पालने वाली इंदिरा देवी के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह भ्रष्ट तंत्र से लड़ सके। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या इस देश में न्याय सिर्फ पैसे वालों के लिए है? पीड़िता ने उच्चाधिकारियों से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने, दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित करने और न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।