प्रेमचंद वैश्विक दौर में भी प्रासंगिक है : कमल रंगा
THE BIKANER NEWS:-
बीकानेर 31 जुलाई 2026*प्रज्ञालय संस्थान द्वारा उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 145वीं जयंती स्थानीय नत्थूसर गेट के बाहर स्थित लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन में आज प्रात: समारोहपूर्वक आयोजित की गई। संस्थान के प्रतिनिधि वरिष्ठ शिक्षाविदï् राजेश रंगा ने बताया कि इस वर्ष आयोजित होने वाला उक्त जयंती समारोह विशेष तौर से बालकों को समर्पित रहा। क्योंकि उक्त समारोह में मुंशी प्रेमचंद की चर्चित कहानी ‘ईदगाह’ के नाटï्य रूपांतरण का वाचन बालकों द्वारा किया गया। जिसके माध्यम से बाल मन की संवेदनाओं एवं रिश्तों के मिठास का महत्व बालकों को समझाया गया।
इस अवसर पर आयोजित ‘वैश्विक दौर में प्रेमचंद की प्रासंगिकता’ विषयक परिसंवाद का आयोजन भी रखा गया। परिसंवाद की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद हिन्दी-उर्दू के महान् गद्यकार थे। उनका सम्पूर्ण साहित्य मानवीय चेतना, सामाजिक विडंबनाओं से मुठभेड़ कर मानवीय संवदेनाओं की सूक्ष्म पड़ताल करते हुए शोषित वर्ग विशेष तौर से किसान और मजदूर की आवाज बनकर सशक्त पेरोकारी करता रहा है।
रंगा ने आगे कहा प्रेमचंद की प्रासंगिकता आज के वैश्विक दौर में उतनी ही है, जितनी पहले थी। क्योंकि सिर्फ समय और अन्य जीवन उपक्रम नए ढंग से हो रहे हैं, तो वहीं आज भी गरीब मजदूर, किसान शोषित वर्ग का शोषण नए तरीकों से हो रहा है।
परिसंवाद में भाग लेते हुए वरिष्ठ शायर क़ासिम बीकानेरी ने कहा कि प्रेमचंद की प्रासंगिकता कल भी थी, आज भी है और कल भी रहेगी। इसी क्रम में युवा कवि गिरिराज पारीक ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की चर्चित कहानियां ‘पूस की रात’, ‘कफन’ आदि आज भी प्रासंगिक हैं।
परिसंवाद में अपने विचार रखते हुए वरिष्ठ शिक्षाविदï् भवानी सिंह राठौड़ ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद द्वारा जिन मानवीय मूल्यों को स्थापित करने के लिए साहित्य रचा गया, वह आज भी व्यवहारिक है। परिसंवाद में महावीर स्वामी, हरिनारायण आचार्य, हेमलता व्यास, सहित कई गणमान्यों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपने समग्र साहित्य में जिस सच को उकेरा उसकी प्रासंगिकता आज भी है।
समारोह का संचालन युवा संस्कृतिकर्मी आशीष रंगा ने करते हुए प्रेमचंद की चर्चित कहानी ‘कफन’ के कुछ अंश सुनाए। सभी का आभार शिक्षाविदï् अशोक शर्मा ने ज्ञापित किया।