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लोकतंत्र के महापर्व के माध्यम से राजस्थानी भाषा के वाजिब हक के समर्थन के लिए किया अनुरोध

 

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर 03 सितंबर, 2026*करोड़ों लोगों की जनभावना, अस्मिता एवं उनकी सांस्कृतिक पहचान मातृभाषा राजस्थानी अपने वाजिब हक के लिए दशकों से इंतजार कर रही है। राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता मिले, प्रदेश की दूसरी राजभाषा बने एवं प्राथमिक स्तर से उच्च शिक्षण तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा राजस्थानी हो इसी महत्वपूर्ण मांग के समर्थन में राजस्थानी युवा लेखक संघ के माध्यम से नगर के हिन्दी, उर्दू और राजस्थानी के साहित्यकारों ने हाल ही में होने वाले शहर की सरकार के चुनाव अर्थात् ८० वार्ड के पार्षदों का जो मतदान होगा इस बाबत नगर के साहित्यकारों जिनमें प्रमुख रूप से राजस्थानी मान्यता आंदोलन के प्रवर्तक वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने मांग की है। साथ ही नगर के वरिष्ठ साहित्यकार मालचन्द तिवाड़ी, डॉ. मदन सैनी, बुलाकी शर्मा, जाकिर अदीब, कासिम बीकानेरी, जुगल किशोर पुरोहित, गिरिराज पारीक, श्रीमती इन्द्रा व्यास, पुनीत कुमार रंगा, डॉ. नृसिंह बिन्नाणी, डॉ. फारूक चौहान, विपल्लव व्यास, बाबूलाल छंगाणी, आनंद छंगाणी सहित अन्य साहित्यकारों ने सभी उम्मीदवारों से अनुरोध किया है कि वे उक्त चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं से सम्पर्क करते हुए तथा अन्य उपक्रम करते हुए यथा संभव हो सके, प्रचार सामग्री आदि में अधिकाधिक राजस्थानी भाषा का प्रयोग कर माँ के सम्मान में आदरणीय मातृभाषा राजस्थानी के लिए अपना महत्वपूर्ण भाषाई सहयोग प्रदान कर इस भाषा आंदोलन के अनुष्ठान में अपनी भूमिका रखकर राजस्थानी की संवैधानिक मान्यता व प्रदेश की दूसरी राजभाषा घोषित हो एवं प्राथमिक स्तर से शिक्षा का माध्यम राजस्थानी हो जैसी महत्वपूर्ण मांगों के आंदोलन को अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करने का नगर का साहित्य समाज आपसे अनुरोध करता है। आप इस बाबत गंभीरता से चिंतन-मनन कर मातृभाषा राजस्थानी के हक में अपनी बात रखेंगे।