राष्ट्रीय कवि चौपाल की 571 वीं श्रंखला विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस एवं राजस्थानी भाषा को समर्पित ऋषि पुरोधा साधक के सम्मान मंथन में समर्पित रही
भाग्य तुझे पहचाना किसने, तुम अनजान क्षितिज से उपर...
जिस काम से जगत कतराए उन हितकारी काम में.. "सावधान इंडिया"
कवि एक सपेरा जिसके पिटारे से सांप नहीं साहित्य की देदिप्यमान किरणें प्रस्फुटित
खाद मा रळगी युरिया है, मानखे मा बढगी दुरिया।
राष्ट्रीय कवि चौपाल की 571 वीं श्रंखला विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस एवं राजस्थानी भाषा को समर्पित ऋषि पुरोधा साधक के सम्मान मंथन में समर्पित रही, आज के कार्यक्रम बतौर संस्थापक सदस्य में सरदार अली परिहार व अध्यक्षता में डॉ हरिदास हर्ष, मुख्य अतिथि कर्मठ समाजसेवी पुरुषार्थी दिनेश भदोरिया विशिष्ट अतिथि में शिक्षाविद प्राचार्या अलका डोली पाठक आदि मंच पर शोभित हुए कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने कहा कि राष्ट्रीय कवि चौपाल के 12 वर्ष में पदार्पण पर अतिरेक हर्ष में 3 सम्मान *"कालजयी" - "दिग्गविजयी" - "अनन्तविजयी"* सम्मान 573 वीं कड़ी से शुभारम्भ किया जाना है संदर्भ पुनः क्रियात्मक सुझाव अपेक्षित है। संस्थापक सदस्य सरदार अली परिहार ने अपने काव्यात्मक अभिव्यक्ति कि आदर्श समाज की स्थापना में मुख्य दायित्व साहित्यकार का... कि वह समाज समक्ष निश्छल, व्यसन मुक्त जीवन जनहित में जीएं, कार्यक्रम अध्यक्ष वरीष्ठ साहित्यकार डॉ हरिदास हर्ष ने रसीले-चुटीले, हास्य-व्यंग्य अंदाज में कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए कहा कि भाग्य तुझे पहचाना किसने, तुम अनजान क्षितिज से उपर, गहन जलद विधुत के अंदर, उच्च श्रंग अरु जलनिधि तल पर, ज्योतिर्मय बिखरी मुस्कानें,.. कार्यक्रम मुख्य अतिथि समाजसेवी दिनेश भदोरिया ने स्व जीवन के संस्मरण को बोद्धिक में अभिव्यक्ति दी .. कि लगातार सेवाओं के मौके ढूंढते रहो, सातों सुख चाहें तो सामुहिक परिवार में रहो.. जिंदगी का क्या, आज़ है कल नहीं, जिस काम से जगत कतराए वे सर्व हितकारी काम सावधान इंडिया करे, विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद प्राचार्या श्रीमती अलका डोली पाठक ने कवि एक सपेरा जिसके पिटारे से सांप नहीं, साहित्य की देदिप्यमान किरणें प्रस्फुटित होती है, .. हर पल मुस्कराओ बड़ी खास है जिंदगी, क्या सुख, क्या दुःख.. बड़ी आश है जिंदगी
विप्लव व्यास : चेत भाईडा़! चेत म्हारा भाई चेत। आय ऊभा थारै द्वारै आखै मुळ्क रा सेठ।। कैलाश टाक : खाद मा रळगी युरिया है, मानखे मा बढगी दुरिया। गई जवानी बाहरे भाव, मुंडे पड़गी झुर्रियां।। बमचकरी : जीवण रै सफर मांय ना कदैई थकियो हुं... पम्मी कोचर :- जब पड़ा नगाड़ा, बजा ढोल, हर कोई बोला..ये तो फटा ढोल है, पिटा ढोल है। कुछ ना कुछ तो बड़ा झोल है, दिखता शेर सा, बकरी का खोल है।।..
*इसी बीच राष्ट्रीय कवि चौपाल द्वारा 5 दशकों से मानवीय एवं जीव सेवारत श्री दिनेश भदोरिया एवं शिक्षाविद प्राचार्या अलका डोली पाठक का शाल श्रीफल रत्न जड़ित मोतीयन माला से सम्मान किया गया उपस्थित सभी साहित्य वृंद ने करतल ध्वनि से स्वागत किया*
कासिम बीकानेरी : हमको जो जीवन देते थे, क्यूं हमने काटे पैड़,.. कृष्णा वर्मा : देख प्रदूषण का कहर, कुदरत इंसान से घबराएं, फिर भी मानव इस कुदरत की रक्षा न कर पाए, साधक ने कहा साहित्यकार सुख दुःख, मान अपमान से परे स्वयं को भूल सर्वहित में जीता मरता है
एडवोकेट उमा शर्मा ने राष्ट्रीय कवि चौपाल के साहित्य अनुष्ठान को सामयिक प्रेरणादायी बताया , ... मेहराजुद्दीन एडवोकेट : बिना बुलाए मैं आया ही क्यों,अब एक कोने में इज्जत बचाकर बैठा हूं,.. सिराजुद्दीन भुट्टा : इश्क प्यार मुहब्बत , पत्नी..... कैलाश चारण देशनौक : सुमिरन करले मौरे मना है,.. पवन चड्ढ़ा : ये जो पब्लिक है सब जानती है राधा किशन सोनी तूं गंगा की मौज में, मैं यमुना की धारा
आज के कार्यक्रम में 20 साहित्य वृंद की रचनाओं का लोकार्पण हुआ तथा साहित्य अनुरागियों में करणी सिंह, साकिर पत्रकार, किशनलाल सरदाना, कमल तंवर, छोटू खां खोखर, मदनलाल सोनी, एडवोकेट अनिल योगी, धर्मेंद्र राठोड़ धन्नजय, श्रीकांत आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन काव्य धारा, शायराने अंदाज में दार्शनिक लहज़े में श्री मती प्ममी कोचर आचार्य ने किया जबकि आभार रामेश्वर साधक ने किया