गणगौर का पर्व प्रकृति के संरक्षण का भी पर्व है-कमल रंगा
नालन्दा में हुआ गणगौर उत्सव का आयोजन
इस अवसर पर राजस्थानी भाषा के ख्यातनाम साहित्यकार कमल रंगा ने गणगौर उत्सव के आयोजन की महत्ता बताते हुए कहा कि गणगौर का त्योहार भगवान शिव और पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है। उनकी पूजा से पति-पत्नी के बीच प्रेम और समर्पण बढ़ता है। गणगौर के दिन सुहागिन महिलाएँं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए पूजा करती हैं। गणगौर के दिन बालिकाएं अच्छे पति को पाने के लिए गणगौर की पूजा करती हैं। गणगौर का पर्व प्रकृति के संरक्षण का भी पर्व है क्योंकी इसमें महिलाएं प्रकृति के गीत गाकर और नृत्य करके प्रकृति की सुंदरता का जश्न मनाती हैं।
शाला प्राचार्य राजेश रंगा ने इस नवाचार को बहुत ही सराहनीय कार्य बताया क्योंकि आज के दौर में पाश्चात्य संस्कृति की हौड़ में भारतीय संस्कृति एवं संस्कार को अपनाना आज के युवा अपनी तौहिन समझता है। ऐसी स्थिति में शाला परिवार के छोटे-छोटे बच्चों के द्वारा इस प्रकार के पारंपरिक तीज-त्योहार को मनाना भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत करता दिखाई दे रहा है। ऐसे कार्यक्रमों से आने वाली पीढ़ियां इन परंपराओं को निभाती रहेगी। जिससे भारतीय सभ्यता और संस्कृति और अधिक सशक्त होगी।
शाला की सांस्कृतिक प्रभारी हेमलता व्यास ने बताया कि आज शाला में बच्चों के द्वारा गणगौर और इशर का श्रृंगार, रंगोली, घुड़ले एवं गणगौर माता के गीत आदि गाकर खुब हर्षोल्लास से गणगौर का पर्व मनाया।
करुणा क्लब प्रभारी हरिनारायण आचार्य ने करूणा क्लब द्वारा वर्ष पर्यन्त किए जाने वाली विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया।
शाला की सांस्कृतिक सहप्रभारी प्रीति राजपूत ने बताया कि इस अवसर पर शाला की छात्रा आर्या जोशी व खुशी गहलोत ने गणगौर व इशर का रूप धारण कर मनमोहक प्रस्तुति दी, वहीं तनुश्री कच्छावा, कृतिका बोड़ा, जाह्नवी बोहरा, वंदनी पुरोहित, योगिता व्यास, चारूता पुरोहित ने गवर माता के मांडणे मांडकर तथा दीपिका छंगाणी, अर्चना छंगाणी, राधिका ओझा, भूमिका गहलोत, कामना कंवर, ममता सैन, सारिका रामावत, अनन्या शर्मा ने गणगौर के पांरपरिक गीत ‘छोड़ इशर गवरल रो दुपट्टों, बाड़ी वाला बाड़ी खोल बाड़ी री किवाड़ी खोल जैसे मनमोहक गीत गाकर सबका मन मोह लिया। वहीं शाला की अध्यापिकाएं मीनाक्षी गौड़, सीमा पालीवाल, सीमा स्वामी, राजेश्वरी व्यास, दुर्गा रंगा, सुमन खुड़िया, अंजू राव, दीपिका राजपूत, यशोदा शर्मा, अलका रंगा, बबीता पुरोहित, अंजू भादाणी, इन्दूबाला व्यास, अरूणा मारू, अरूणा व्यास, नीलम व्यास आदि ने घुड़ले के गीतों के साथ-साथ नृत्य प्रस्तुत कर गवर माता के समक्ष अपने भाव व्यक्त किए।
कार्यक्रम का संचालन विभा रंगा ने किया एवं सभी का आभार करूणा क्लब सहप्रभारी आशीष रंगा ने किया।