रेगिस्तानी धोरों में बाल विवाह के विरूद्ध आवाज ऊठी वहीं मीरा एवं कबीर के भजनों ने समां बांधा
नाटक का निर्देशन करते हुए संजय श्रीमाली ने बताया कि नाट्य के द्वारा हम अपनी बात बहुत ही सरल एवं सहजता से संप्रेष्ण कर सकते है। नाटक सीधा दर्शकों के मन को छूता है जिससे वह नाटक के साथ आत्मसात होते है।
इस अवसर पर विशेष आमंत्रित सामाजिक कार्यकर्ता सुशिला ओझा ने कहा कि हमें सामाजिक मुद्दों को उठाना चाहिए इसके लिए माध्यम कुछ भी हो सकता है। हमारे छोटे-छोटे प्रयासों से ही हम समाज में अपना योगदान दे सकते है।
‘‘सहेली की सहायता’’ नाटक बाल विवाह पर केन्द्रित था जिसमें दो सहेलिया आपसी जागरूकता के माध्यम से बाल विवाह को रोकती है तथा इस सामाजिक कुरीति को बंद करने हेतु आहवान करती है।
‘‘मोबाईल का चक्रव्यूह’’ नाटक वर्तमान में सोशल मीडिया एवं बच्चों में मोबाईल की लत पर आधारित था। नाटक में बताया गया कि किस प्रकार मोबाईल ने हम सब को जकड़ रखा है तथा मोबाईल से हम किस प्रकार दूर रह सकते है उसके बारे में भी बतलाया गया।
दोनो नाटकों में सभी पात्र किशोरी बालिकाएं रही। तथा सभी पात्रों ने बहुत ही मंजे हुए ढंग किरदार निभाये। तथा उनके डायलॉग सम्प्रेष्ण की सभी ने तारीफ की।
*मीरा, कबीर के भजन पर कार्यशाला*
कार्यक्रम में दूसरी ओर सुनिता श्रीमाली द्वारा मीरा के भजन, कबीर वाणी, गज़ल आदि किशोरी बालिकाओं को गायकी के बारे में बताया तथा उनसे निरन्तर अभ्यास करवा कर भजन तथा कबीर वाणी गायन हेतु प्रेरित किया।
सुनिता श्रीमाली ने इस अवसर पर भक्ति संध्या का आयोजन कर सामूहिक भजन एवं गीतों से समां बांध दिया। धोरों की धरती में मीरा एवं कबीर वाणियों की गूंज अनवरत गूंजती हमें सुनाई देती रहेगी।
इस अवसर पर उरमूल सीमान्त समीति के सचिव सुनील लहरी, भोजराज, टीना वसू, रामलाल, रीधिमा ओझा, श्रुति बीका, अवनी श्रीमाली एवं अन्य कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अषोक भाटी का पूर्ण मार्गदर्षन रहा।
सहेली की सहायता नाटक में धापू, अनिशा, रंजना, अन्ना, लक्ष्मी, कल्पना, पूजा आदि ने किरदार निभाए।
मोबाईल का चक्रव्यूह नाटक में कोमल, सुमन, लक्ष्मी, पूजा, रंजना, कल्पना एवं अन्ना ने अपने किरदार बखूबी निभाए। कार्यक्रम में टीना वसू एवं बिलकिश पठान ने पूर्ण सहयोग किया।