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विश्व बंजारा दिवस पर दिल्ली में भव्य आयोजन: शिक्षा, इतिहास लेखन और एकता पर जोर

 
विश्व बंजारा दिवस के अवसर पर 8 अप्रैल को अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर, दिल्ली में एक भव्य कार्यक्रम दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से बंजारा समाज के हजारों लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में समाज के प्रबुद्ध जनों, नेताओं और युवा साथियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम के दौरान तुलछा राम बंजारा (बीकानेर, राजस्थान), जो बंजारा समाज के इतिहास पर शोध कार्य कर रहे हैं, ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बंजारा समाज के इतिहास के उन महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला, जहाँ से स्वतंत्रता संग्राम में बंजारों के अमूल्य योगदान को समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज के पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण यह है कि बंजारा इतिहास न तो सही रूप में लिखा गया और न ही उसे शिक्षा में स्थान मिला। उन्होंने जोर देकर कहा कि “जिस समाज का इतिहास नहीं होता, उसका अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है,” इसलिए अब समय आ गया है कि हम अपने इतिहास के लेखन और शोध पर गंभीरता से कार्य करें।
कार्यक्रम में सरकार के समक्ष बंजारा शोध छात्रवृत्ति शुरू करने की मांग भी रखी गई, ताकि युवा शोधकर्ता अपने इतिहास और संस्कृति पर कार्य कर सकें। कार्यक्रम की संयोजक कविता राठौर ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री इन्दर नील नाईक ने बंजारा संस्कृति के संरक्षण, शिक्षा के प्रसार और आने वाली पीढ़ी को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के मंत्री बाबूलाल जी, पूर्व लोकसभा सांसद डॉ. उमेश जाधव ने भी अपने विचार रखे। साथ ही बाबा लखी शाह बंजारा के सम्मान में सरकार से पाँच एकड़ भूमि देने की मांग उठाई गई।
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण की धर्मपत्नी रश्मि बंजारा ने भी कविता के माध्यम से समाज को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने बंजारा संस्कृति, एकता और शिक्षा के महत्व को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में बंजारा संस्कृति से जुड़ी अद्भुत झांकियां, पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और आकर्षक पारंपरिक पहनावा देखने को मिला, जिसने उपस्थित लोगों को अपनी समृद्ध विरासत से जुड़ने का अवसर प्रदान किया और पूरे माहौल को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।
इस अवसर पर महाराष्ट्र से संकर पवार, हरियाणा से कुलवंत सिंह बाजीगर, राजस्थान से सूरजपाल बढ़तीय (AIBP), कोटा से विक्रम एवं टोनी, मध्य प्रदेश से रतन जी, तथा जीतेन्द्र, गणपत, महेंद्र सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विचार रखे और समाज को एकजुट होकर आगे बढ़ाने का आह्वान किया। साथ ही दिल्ली से हरीश जी, गिरधारी जी एवं प्रेम जी की भी महत्वपूर्ण सहभागिता रही।
अंत में जसमेर सिंह ने पूरे आयोजन का सफल व कुशल नेतृत्व किया तथा सभी आए हुए अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में शिक्षा, एकता, संस्कृति संरक्षण और सामाजिक उन्नति को केंद्र में रखते हुए यह संदेश दिया गया कि यदि बंजारा समाज को आगे बढ़ाना है, तो इतिहास लेखन, शिक्षा और संगठन को प्राथमिकता देनी होगी। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बना, बल्कि समाज के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम भी साबित हुआ।