{"vars":{"id": "125777:4967"}}

अमेरिका-ईरान तनाव का असर: औंधे मुंह गिरे सोने-चांदी के दाम

 
THE BIKANER NEWS:अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और बाजार में मुनाफावसूली के कारण सर्राफा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है। दोनों कीमती धातुएं अपने ऑल-टाइम हाई से क्रैश होकर काफी नीचे आ गई हैं।

सोने की कीमतों में भारी गिरावट

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक सोने में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार नरमी देखी जा रही है:

  • ताजा भाव: शुक्रवार को 24 कैरेट सोने (10 ग्राम) का भाव 3,263 रुपये टूटकर 1.43 लाख रुपये पर आ गया। इससे पहले बुधवार को यह 1.46 लाख रुपये पर था।
  • ऑल-टाइम हाई से ₹33 हजार सस्ता: सोने ने 29 जनवरी 2026 को 1.76 लाख रुपये का अपना ऑल-टाइम हाई छुआ था। मौजूदा समय में यह अपने उच्चतम स्तर से करीब 33 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है।
  • साल की शुरुआत का स्तर: 31 दिसंबर 2025 को सोना 1.33 लाख रुपये के स्तर पर था।

चांदी में तगड़ा क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.22 लाख पर आई

सोने के मुकाबले चांदी में कहीं अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और यह अपने उच्चतम स्तर से बहुत तेजी से नीचे गिरी है:

  • ताजा भाव: शुक्रवार को एक किलो चांदी की कीमत 13,167 रुपये की भारी गिरावट के साथ 2.22 लाख रुपये पर आ गई। इससे पहले 25 मार्च को यह 2.35 लाख रुपये थी।
  • ऑल-टाइम हाई से क्रैश: 29 जनवरी 2026 को चांदी 3.86 लाख रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर थी। पिछले 57 दिनों में इसमें 1.64 लाख रुपये की भारी गिरावट (क्रैश) दर्ज की गई है।
  • साल की शुरुआत का स्तर: 31 दिसंबर 2025 को चांदी 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी।

अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग क्यों होते हैं?

अक्सर देखा जाता है कि एक ही देश में शहरों के हिसाब से सोने के रेट बदल जाते हैं। इसके मुख्य कारण हैं:

  1. ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और सुरक्षा का भारी खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ती है, जिससे स्थानीय कीमतें बढ़ जाती हैं।
  2. खरीदारी की मात्रा (Volume): दक्षिण भारत जैसे क्षेत्रों में देश की कुल खपत का करीब 40% सोना खरीदा जाता है। ज्वैलर्स बड़ी मात्रा में (थोक में) सोना खरीदते हैं जिससे उन्हें छूट मिलती है और वे ग्राहकों को कम दाम पर सोना दे पाते हैं।
  3. लोकल ज्वैलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर की अपनी स्थानीय ज्वैलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वैलर्स एसोसिएशन) होती है, जो स्थानीय करों और स्थितियों के आधार पर दाम तय करने में भूमिका निभाती है।