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Delhi Metro में लाजवाब होगा सफर, 2026 तक बनकर तैयार होगा पहला स्प्लिट स्टेशन, जानें फायदे

 

Delhi metro लाखों लोगों का सफर आसान होने वाला है। बता दे की मेट्रो लोगों की किस्मत बदलने वाली है। फिलहाल चौथे चरण में निर्माणाधीन गोल्डन लाइन (तुगलकाबाद-एयरोसिटी कॉरिडोर) कई मायनों में अलग होगी।

इस डबल डेकर कॉरिडोर के हिस्से में खानपुर और अंबेडकर नगर में दो मेट्रो स्टेशनों का डिजाइन भी दिल्ली मेट्रो के अन्य एलिवेटेड स्टेशनों से अलग होगा।

इन दोनों स्टेशनों के प्लेटफॉर्म सड़क के दोनों ओर दो अलग-अलग इमारतों से जुड़े होंगे, इसलिए स्टेशनों की दोनों इमारतों के कॉनकोर्स को 45 मीटर लंबे फुट ओवरब्रिज (एफओबी) से जोड़ा जाएगा, जो एक तरफ से दूसरी तरफ जा सकेगा।

डीएमआरसी का दावा है कि दिल्ली मेट्रो में पहली बार स्प्लिट स्टेशन बनेंगे, जो एफओबी से जुड़ेंगे, लेकिन रेड लाइन शहीद स्थल नई बस अड्डा गाजियाबाद स्टेशन भी दो अलग-अलग इमारतों में है।

इस स्टेशन की दोनों इमारतें कॉनकोर्स रोड पर एक लोहे के पुल से जुड़ी हुई हैं।

मिली जानकारी के अनुसार बता दे की निर्माणाधीन गोल्डन लाइन की कुल लंबाई 23.62 किलोमीटर होगी। इसका 19.34 किलोमीटर का हिस्सा भूमिगत और संगम विहार से साकेत जी ब्लॉक तक 4.28 किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड होगा।

मेट्रो कॉरिडोर से जुडी कुछ अहम बातें

  1. सड़क से करीब 20 मीटर की ऊंचाई पर प्लेटफॉर्म होगा।
  2. पारंपरिक मेट्रो स्टेशनों के विपरीत इन दोनों स्टेशनों के कॉनकोर्स पर तकनीकी कमरे, सुरक्षा जांच और ऑटोमेडिकल फेयर कलेक्शन (एएफसी) गेट होंगे।
  3. स्टेशन नियंत्रण कक्ष व शौचालय जैसी सार्वजनिक सुविधाएं कॉनकोर्स के बजाय प्लेटफॉर्म के तल पर मौजूद होंगी।
  4. लिहाजा, प्लेटफॉर्म नौ मीटर चौड़ा होगा। सामान्य तौर पर मेट्रो स्टेशनों के प्लेटफॉर्म तीन से चार मीटर चौड़े होते हैं। प्लेटफॉर्म 140 मीटर लंबा होगा।