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प्रयोगशाला सहायक भर्ती-2018 में फर्जीवाड़े के आरोप, अभ्यर्थियों ने दी आंदोलन और वोट बहिष्कार की चेतावनी

 
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THE BIKANER NEWS:-जयपुर/बीकानेर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान में प्रयोगशाला सहायक भर्ती-2018 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 19 अगस्त 2026 को जारी आदेश क्रमांक 847 के बाद प्रदेशभर के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और दस्तावेजों में हेरफेर के गंभीर आरोप लगाए हैं। अभ्यर्थियों का दावा है कि 'अकुशल श्रमिक' और 'हेल्पर' के अनुभव प्रमाण-पत्रों के आधार पर कुछ अभ्यर्थियों को प्रयोगशाला सहायक के पद पर नियमित नियुक्ति दी गई।
अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि पुनर्सत्यापन के दौरान सामने आए दस्तावेजों और नियुक्ति आदेश के बीच गंभीर विसंगतियां हैं। मामले को लेकर राजस्थान संपर्क पोर्टल पर भी कई परिवाद दर्ज करवाए गए हैं।
दस्तावेजों को लेकर उठे सवाल
परिवादियों के अनुसार, फरीद खान (आईडी 22114190) के पुनर्सत्यापन प्रपत्र क्रमांक 756, 757 और 758 में उन्हें 'अकुशल श्रमिक' के रूप में प्रमाणित किया गया है। इसके बावजूद आदेश क्रमांक 847 के तहत जिला अस्पताल फालना में उन्हें प्रयोगशाला सहायक के पद पर नियुक्त किए जाने का दावा किया गया है।
इसी तरह श्रीमती भारती (आईडी 22114130) से संबंधित दस्तावेजों में कार्य 'सहायक/हेल्पर/वार्ड बॉय' तथा पदनाम 'अर्द्धकुशल श्रमिक' दर्ज होने का आरोप है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इसके बावजूद उनका नाम CHC लूणी, जोधपुर की नियमित नियुक्ति सूची में शामिल किया गया।
संपर्क पोर्टल पर दर्ज हुए परिवाद
मामले को लेकर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के अभ्यर्थियों ने राजस्थान संपर्क पोर्टल पर शिकायतें दर्ज करवाई हैं। इनमें प्रमुख रूप से ये परिवाद शामिल बताए गए हैं—
 किशन गोपाल छंगाणी– सत्यनारायण दर्जी  नितेश सोनी  रोहित शर्मा व अन्य अभ्यर्थी
अभ्यर्थियों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अभी तक उन्हें न्याय नहीं मिला है।
नियुक्ति नहीं मिली तो वोट बहिष्कार की चेतावनी
बीकानेर के किशन गोपाल छंगाणी, हनुमानगढ़ के भादरा क्षेत्र से राकेश कुमार जोशी, चित्तौड़गढ़ के रोहित शर्मा और झालावाड़ के नितेश सोनी सहित कई अभ्यर्थियों ने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच और पात्र अभ्यर्थियों को न्याय देने की मांग की है।
अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगामी निकाय चुनाव में सभी राजनीतिक दलों के बहिष्कार का आह्वान करेंगे। उनका कहना है कि लंबे समय से भर्ती और संविदा नियुक्तियों से जुड़े विवादों के कारण अभ्यर्थियों में आक्रोश है।
तीन प्रमुख मांगें
अभ्यर्थियों ने आदेश क्रमांक 847 की जांच कर उसे निरस्त करने, कथित फर्जी सत्यापन और अनुभव प्रमाण-पत्रों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे राजस्थान हाईकोर्ट का रुख करने के साथ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में शिकायत दर्ज करवाएंगे।
हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभाग या अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।