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डूडी गुट के खास सिपहसलार आनंद जोशी को झटका, नई कांग्रेस कार्यकारिणी में नो एंट्री

 
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बीकानेर। शहर जिला कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी घोषित होते ही कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में हलचल तेज हो गई है। नई सूची में कई पुराने चेहरों को फिर से जिम्मेदारी मिली, वहीं कुछ नए नेताओं को भी संगठन में जगह दी गई। लेकिन इस पूरी कवायद के बीच जिस नाम ने सबसे ज्यादा चौंकाया, वह है आनंद जोशी।

लगातार तीन बार जिला कांग्रेस कमेटी में महासचिव रह चुके आनंद जोशी इस बार नई कार्यकारिणी में जगह नहीं बना पाए। जोशी को कांग्रेस के सक्रिय और आंदोलनकारी नेताओं में गिना जाता है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने के साथ वे पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी के खास सिपहसलारों में भी माने जाते रहे हैं।

आखिर क्यों बाहर हुए आनंद जोशी?

नई कार्यकारिणी में जोशी का नाम नहीं होने के बाद कांग्रेस के राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है  कुछ बड़े नेताओं के विरोध के चलते जोशी को इस बार संगठन की टीम से बाहर रखा गया।

हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। इसलिए विरोध की यह बात फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं और पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के दावों तक ही सीमित है।

तीन बार महासचिव, फिर भी इस बार ‘नो एंट्री’

आनंद जोशी का नाम सूची से बाहर होना इसलिए भी अहम है क्योंकि वे लगातार तीन बार महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर रह चुके हैं। कांग्रेस के आंदोलनों में उनकी सक्रियता और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ उन्हें पार्टी के पुराने सक्रिय चेहरों में शामिल करती है।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इस बार संगठन की नई टीम तैयार करते समय तीन बार महासचिव रह चुके जोशी को क्यों दरकिनार किया गया?

क्या बदल गया कांग्रेस का सियासी समीकरण?

बीकानेर कांग्रेस की नई कार्यकारिणी को लेकर एक बार फिर गुटीय राजनीति की चर्चाएं सामने आ रही हैं। पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं के प्रभाव और राजनीतिक खेमों के समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

आनंद जोशी का बाहर होना भी इसी बदलते सियासी समीकरण का हिस्सा माना जा रहा है। खासकर तब, जब उन्हें लंबे समय से डूडी गुट के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है।

जोशी की खामोशी भी बनी चर्चा का विषय

दिलचस्प बात यह है कि नई कार्यकारिणी में जगह नहीं मिलने के बाद आनंद जोशी फिलहाल शांत हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से न तो कोई नाराजगी जाहिर की है और न ही पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कोई बयान दिया है।

लेकिन राजनीति में खामोशी भी कई बार बहुत कुछ कहती है।

अब सवाल यह है कि आनंद जोशी आगे क्या कदम उठाते हैं? क्या वे संगठन के फैसले को स्वीकार कर आगे भी पार्टी के लिए काम करते रहेंगे या फिर आने वाले दिनों में अपनी राजनीतिक नाराजगी जाहिर करेंगे?

फिलहाल इतना जरूर है कि बीकानेर कांग्रेस की नई कार्यकारिणी ने पदों का बंटवारा तो कर दिया, लेकिन इसके साथ ही पार्टी के अंदर नई सियासी चर्चाओं का दरवाजा भी खोल दिया है।