बीकानेर: उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना, हाईकोर्ट से रद्द (Quash) मामले में पुलिस ने की अवैध गिरफ्तारी
THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर में पुलिस की कार्यप्रणाली और हठधर्मिता का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। बीकानेर पुलिस पर राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court) के आदेशों की खुली अवमानना का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस ने एक ऐसे मामले में एक युवक को गिरफ्तार कर लिया, जिसकी एफआईआर (FIR) को उच्च न्यायालय द्वारा पहले ही पूर्णतः समाप्त (Quash) किया जा चुका था।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, पीड़ित अभियुक्त मुकेश बिश्नोई के खिलाफ मुक्ता प्रसाद नगर पुलिस स्टेशन में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR संख्या 231/25) दर्ज की गई थी। कुछ समय बाद, दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से राजीनामा हो गया। इस मामले की समस्त कार्यवाही को समाप्त करने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने आदेश पारित कर उक्त एफआईआर को पूर्णतः रद्द (Quash) कर दिया था।
आदेश को दरकिनार कर की गई गिरफ्तारी
हाईकोर्ट से मामला खत्म होने के बावजूद, 12 मई 2026 को इस प्रकरण में CO सिटी अनुज डाल द्वारा मुकेश को हिरासत में ले लिया गया। फरियादी मुकेश ने पुलिस को उच्च न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रतिलिपि (Certified Copy) भी दिखाई और निवेदन किया कि इस मामले को हाईकोर्ट द्वारा समाप्त किया जा चुका है और इसमें कोई कार्यवाही शेष नहीं है।
आरोप है कि CO सिटी ने उच्च न्यायालय के आदेश को जबरन नकार दिया और मुकेश को गिरफ्तार कर एससी/एसटी (SC/ST) न्यायालय, बीकानेर में पेश कर दिया। पीड़ित पक्ष ने इसे पुलिस अधिकारी द्वारा पद का दुरुपयोग और पूर्णतः गैरकानूनी कदम बताया है।
अधिवक्ता की पैरवी और न्यायालय का फैसला
इस गैरकानूनी गिरफ्तारी के खिलाफ एससी/एसटी कोर्ट में मुकेश की ओर से अधिवक्ता श्री सुरेंद्र पाल शर्मा और उनकी टीम ने पैरवी की। बचाव पक्ष के वकीलों ने पीठासीन अधिकारी के संज्ञान में पूरे मामले के तथ्य और हाईकोर्ट का आदेश रखा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने माना कि पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी गैरकानूनी और हठधर्मितापूर्ण है। एससी/एसटी कोर्ट ने मुकेश को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए और स्पष्ट किया कि उक्त प्रकरण में कोई आगे की कार्यवाही न की जाए क्योंकि मामला पूर्व से ही समाप्त है।
वकालत के पेशे पर गर्व: "न्याय की जीत"
इस घटनाक्रम के बाद विधिक हलकों में यह चर्चा का विषय है कि कैसे एक निर्दोष व्यक्ति पुलिस की मनमानी का शिकार होने से बच गया। वकीलों का कहना है कि ऐसे मामलों में जब एक बेकसूर को न्याय दिलाया जाता है, तो वकालत के पेशे पर गर्व होता है। समाज में पीड़ितों के हितों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने का जो जिम्मा वकीलों के पास है, वह इस प्रकरण में पूरी तरह से सार्थक साबित हुआ है।
पुलिस के खिलाफ अवमानना की तैयारी
अवैध हिरासत और मानसिक प्रताड़ना का शिकार हुए मुकेश बिश्नोई ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि बीकानेर पुलिस द्वारा जबरन फंसाने और उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना करने को लेकर वे संबंधित पुलिस अधिकारी (CO) के खिलाफ न्यायालय की शरण में जाएंगे और कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे।
फिलहाल, पीड़ित पक्ष की ओर से हाईकोर्ट के आदेश की प्रतिलिपि भी सार्वजनिक की गई है, जो पुलिस की इस बड़ी लापरवाही और मनमानी की पोल खोलती है।

