बीकानेर: अवैध बूस्टर रोकने के नाम पर 'पावर कट' की सजा, लेकिन अपनी टंकियों से बहते पानी और टूटी लाइनों पर जलदाय विभाग मौन!
प्रशासन का तर्क और जनता की परेशानी
प्रशासन का तर्क है कि बिजली कटने से लोग अवैध बूस्टर का उपयोग नहीं कर पाएंगे, जिससे पाइपलाइनों में दबाव बना रहेगा और अंतिम छोर तक पानी पहुंचेगा। इसके लिए जलदाय विभाग के सहायक अभियंता बिजली कंपनी (बीकेईएसएल) को सप्लाई का समय बताएंगे।
लेकिन, बीकानेर की इस झुलसा देने वाली गर्मी में जब पारा आसमान छू रहा हो, तब 45 मिनट तक बिना पंखे, कूलर और एसी के रहना किसी कठोर सजा से कम नहीं है। पानी आने के समय ही घरों में कपड़े धोने, सफाई और बर्तन साफ करने जैसे अहम काम होते हैं। बिजली कटने से कामकाजी महिलाओं और आम गृहिणियों का पूरा शेड्यूल बुरी तरह बिगड़ रहा है।
विभागीय लापरवाही: खुद के घर शीशे के, लेकिन दूसरों पर पत्थर!
प्रशासन आम जनता पर तो डंडा चला रहा है, लेकिन जलदाय विभाग की अपनी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है:
- सड़कों पर बहता पानी: शहर में कई जगहों पर पानी की लाइनें टूटी रहती हैं और हज़ारों लीटर पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो जाता है। इन लीकेज को ठीक करने में विभाग को दो-दो, तीन-तीन दिन लग जाते हैं। तब पानी की बर्बादी का दर्द प्रशासन को महसूस क्यों नहीं होता?
- टंकियों से ओवरफ्लो: हाल ही में सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी वायरल हुए हैं जिनमें जलदाय विभाग की अपनी टंकियों से पानी व्यर्थ बहता हुआ दिखाई दे रहा है। जब विभाग अपने ही संसाधनों से हो रही जल बर्बादी नहीं रोक पा रहा, तो उसका खामियाजा पूरी जनता क्यों भुगते?
प्रशासनिक लाचारी या इच्छाशक्ति की कमी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जलदाय विभाग के पास अवैध बूस्टर पकड़ने के लिए अपनी कोई विजिलेंस टीम या दस्ता नहीं है? जो लोग अवैध रूप से बूस्टर चला रहे हैं, उन पर कार्रवाई करने या उन्हें जुर्माना लगाने के बजाय पूरे मोहल्ले की बत्ती गुल कर देना विभाग की घोर प्रशासनिक लाचारी को दर्शाता है।
यह फैसला दोषियों को पकड़ने के बजाय पूरी जनता को सामूहिक सजा देने जैसा है। प्रशासन को चाहिए कि वह अपनी व्यवस्थाएं सुधारे, लीकेज को तुरंत ठीक करे, अपनी टंकियों से होने वाली बर्बादी रोके और अवैध बूस्टर वालों पर सीधी कार्रवाई करे, न कि भीषण गर्मी में आम आदमी के पसीने निकालकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़े।

