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राजस्थानी भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज: विश्व मातृभाषा दिवस (21 फरवरी) पर बीकानेर में महाधरना देगी राजस्थानी मोट्यार परिषद

 
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THE BIKANER NEWS:;बीकानेर, 18 फरवरी 2026: राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करवाने और इसे राजभाषा का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर 'राजस्थानी मोट्यार परिषद' ने एक बार फिर हुंकार भरी है। आगामी 21 फरवरी, 2026 को 'विश्व मातृभाषा दिवस' के अवसर पर परिषद द्वारा बीकानेर में एक दिवसीय विशाल धरने का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में आज आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिषद के पदाधिकारियों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और भाषा की ऐतिहासिक समृद्धि के आंकड़े पेश किए।

विश्व का सबसे बड़ा शब्दकोश राजस्थानी के पास

प्रेस वार्ता में बताया गया कि राजस्थानी भाषा करीब 1200 साल पुरानी है। इसका पहला ग्रंथ 8वीं शताब्दी में उद्योतन सूरी द्वारा रचित 'कुवलयमाला' था। परिषद ने दावा किया कि राजस्थानी भाषा का शब्दकोश संसार की समस्त भाषाओं में सबसे बड़ा है, जिसमें लगभग 2 लाख 10 हजार शब्द हैं। यह भाषा मुहावरों और कहावतों से संपन्न है और यहां एक-एक शब्द के जितने पर्यायवाची हैं, उतने किसी अन्य भाषा में मिलना मुश्किल है। वर्तमान में यह 72 बोलियों और प्राचीन मुड़िया लिपि (अब देवनागरी) के साथ अस्तित्व में है।

1944 से चल रहा है आंदोलन

वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र जोशी ने बताया कि राजस्थानी भाषा की मान्यता का आंदोलन 1944 में दिनाजपुर सम्मेलन से शुरू हुआ था। तब से लेकर आज तक सरकारों ने केवल आश्वासन दिया है, कोई ठोस कार्यवाही नहीं की।

राज्य सरकार चाहे तो अनुच्छेद-345 का कर सकती है उपयोग

संभाग अध्यक्ष डॉ. हरिरामा विश्नोई ने बताया कि सरकार चाहे तो अनुच्छेद-345 के तहत इसे राजभाषा घोषित कर सकती है। उन्होंने लद्दाख (2025), कश्मीर (2020) और झारखंड-बिहार (2018) के अधिनियमों का उदाहरण दिया, जहां बिना संवैधानिक मान्यता के भी स्थानीय भाषाओं (जैसे- मगही, भोजपुरी, डोंगरी, कश्मीरी) को राजभाषा बनाया गया है।

शिक्षा और रोजगार में उपेक्षा

  • यूनिवर्सिटी स्तर: प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. गौरीशंकर प्रजापत और सलाहकार डॉ. नमामि शंकर आचार्य ने बताया कि करीब 100 विद्यालयों और 5 विश्वविद्यालयों में राजस्थानी पढ़ाई जा रही है। यूजीसी और साहित्य अकादमी इसे मान्यता देते हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक स्थायी विभाग को लेकर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया है।
  • नई शिक्षा नीति: कोषाध्यक्ष राजेश चौधरी ने चिंता जताई कि नई शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में देने का प्रावधान है, लेकिन मान्यता न होने के कारण राजस्थान के बच्चे इससे वंचित हैं।

2003 में पास हुआ था प्रस्ताव, केंद्र ने साधी चुप्पी

संभाग उपाध्यक्ष रामअवतार उपाध्याय ने याद दिलाया कि 25 अगस्त 2003 को राजस्थान विधानसभा ने एक प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजा था, लेकिन केंद्र ने आज तक राजस्थानी को मान्यता नहीं दी है।

​जिलाध्यक्ष हिमांशु टाक ने बताया कि मोट्यार परिषद पिछले 25 वर्षों से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रही है और 21 फरवरी को होने वाला आयोजन इसी कड़ी का एक बड़ा हिस्सा है।

ये रहे मौजूद

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश महासचिव प्रशांत जैन, मदन दान दासौड़ी, कमल मारू, शुभकरण उपाध्याय, दिलीप सेन, बजरंग विश्नोई, नखतु चंद और पप्पू सिंह आदि मौजूद रहे।