स्वास्थ्य एवं साहित्य संगम : राष्ट्रीय कवि चौपाल की 575 वीं श्रंखला सामयिक विषय *"दया क्षमा"* को समर्पित रही।
THE BIKANER NEWS:-भूलगी आपरो दरद सुण'र म्हारी रोवण री आवाज,...
दया और क्षमा रचनाकार की दुर्बलता नहीं, वह है सृजन शक्ति का सर्वोच्च शिखर...
क्या मांस अंडो बिन गुजारा हो नहीं सकता तेरा ...
मां भी कहां जनना चाहती है बेटियां
स्वास्थ्य एवं साहित्य संगम : राष्ट्रीय कवि चौपाल की 575 वीं श्रंखला सामयिक विषय *"दया क्षमा"* को समर्पित रही।आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता में सरदार अली परिहार, मुख्य अतिथि में डाॅ हरिदास हर्ष, विशिष्ट अतिथि राजेन्द्र स्वर्णकार, रवि पुरोहित एवं किशन लाल सरदाना आदि मंच पर शोभित हुए। कार्यक्रम शुभारंभ करते हुए रामेश्वर साधक ने कहा कि दया और क्षमा दोनों महा तप है जो राग द्वैष के साथ विकार क्षय करते हैं पर बड़ी बात प्रभो सान्निध्य बनाता है,
डॉ हरिदास हर्ष ने काव्य धारा में सामयिक बात रखते हुए कहा ''भूलगी आपरौ दरद सुण'र म्हारी रोवण री आवाज,... आखे ब्रह्मांड माय राज माया रो, सुरग-नरग,धरा वैकुंठ अधीन... सरदार अली परिहार प्रभो प्रदत साहित्य साधना का एवं पैतृक संस्कारों का आदर करो,.. राजेन्द्र स्वर्णकार ने जीव मात्र पर दया भाव व्यक्त करते हुए कविता माध्यम से अपनी बात रखी.. क्या मांस अंडो बिन गुजारा हो नहीं सकता तेरा ...लागी बिरखा री झड़'र झड़, कार्यक्रम को आरोही क्रम देते हुए कवि साहित्यकार रवि पुरोहित ने साहित्य दृष्टि में बात कही दया और क्षमा किसी रचनाकार की दुर्बलता नहीं, वह है उसकी सृजन शक्ति का सर्वोच्च शिखर... वही साहित्य कालजयी होता है जो मनुष्य को मनुष्य बनें रहने का संदेश दे, बाबू बमचकरी : जोर जबर में पार पड़े ना, कुचरणी रा रंग हजार कर लो कुचरणी
कैलाश टाक : डॉ ने बड़े गौर से देखा मेरा चेहरा, बिना जांच ही कहा आपका दर्द है बहुत गहरा.. शिव दाधीच बीकानेरी : बंटवारे की काली रात में, भारत लहुलुहान हुआ लाखों सपने राख हुए, लाखों घर श्मशान हुए,.. शिवप्रकाश शर्मा : पूर्ण वर्ग संख्या के लिए क्या जोड़े,क्या घटाएं,.. राजकुमार ग्रोवर : आम आदमी तो बस आम ही होता है, उसे काटा जाता है निचोड़ा जाता है
प्रभा कोचर : मां भी कहां जनना चाहती है बेटियां ,.. कृष्णा वर्मा : अपनों की चहल-पहल से घर का कौना कौना रोशन हो जाएगा, नरेश कुमार नाथ : जामे ऐ मुहब्बत, हकीम साहब नब्ज़ देखो इस पागल प्रेमी दिवाने की,.. मेहराजुद्दीन भुट्टा : है बहुत अंधियारा,अब सूरज निकलना चाहिए,सिराजुद्दीन भुट्टा : चुगलखोर घात लगावै, मीठी बातों में फसावै,.. मोहम्मद सलीम भाटी : राम जी री चिड़िया,राम जी रौ खेत, जीमो म्हारी चिड़िया भर भर पेट,... राधाकिशन सोनी : चली गौरी पिय से मिलन को चली,.. पवन चड्ढा : धीरे रे चलो मौरी बांकी हिरनीयां,
आज के कार्यक्रम में 20 साहित्य प्रस्तुतियां हुई और किशन लाल सरदाना, छोटू खां, मधुसूदन विश्नोई, नत्थू, लक्ष्मण राम सोलंकी, मेघराज, विश्वजीत, घनश्याम सौलंकी, सुरेश कुमार हर्ष, साकिर पत्रकार, नत्थू खां आदि कई गणमान्य साहित्य अनुरागी उपस्थिति रही आज के कार्यक्रम का चुटिले रसीले काव्य शायराने अंदाज में हास्यविद बाबू बम चकरी ने किया जबकि आभार रामेश्वर साधक ने किया

