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संस्कार हो तो ऐसे! नन्हे दिव्यांशु ने फिर जीता सबका दिल, गौ-सेवा के लिए समर्पित किया अपना गुल्लक

 
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नापासर (बीकानेर): "भक्ति की कोई उम्र नहीं होती और सेवा का कोई मोल नहीं होता।" इस कहावत को नापासर के एक नन्हे राम-भक्त ने एक बार फिर चरितार्थ कर दिखाया है। अपनी निष्काम सेवा और मासूम भक्ति से इस बालक ने पूरे बीकानेर जिले को गौरवान्वित किया है।

राम मंदिर के बाद अब 'गौ-सेवा' के लिए बढ़ाया हाथ

​नापासर के गांधी चौक निवासी दिव्यांशु पुष्करणा (पुत्र श्री पुरुषोत्तम पुष्करणा, पौत्र स्व. श्री भंवरलाल पुष्करणा) इन दिनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। यह वही नन्हा बालक है, जिसने अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण के समय अपनी बरसों की जमा पूँजी (गुल्लक) दान कर दी थी। अब एक बार फिर दिव्यांशु ने अपनी दरियादिली दिखाई है।

महा-अनुष्ठान में नन्हे भक्त का बड़ा योगदान

​वर्तमान में नापासर की पावन धरा पर नापासर गौरक्षा सेवा समिति (NG ग्रुप) द्वारा 1100 सुन्दरकाण्ड एवं 2200 हनुमान चालीसा के विराट महा-अनुष्ठान का आयोजन होने जा रहा है। इस पावन कार्य और गौ-सेवा की भावना से ओतप्रोत होकर दिव्यांशु ने अपना नया गुल्लक आयोजन समिति को भेंट कर दिया है।

क्यों खास है यह दान?

  • अटूट आस्था: छोटी सी उम्र में धर्म और गौ-माता के प्रति अटूट समर्पण।
  • प्रेरणादायक संदेश: दिव्यांशु का यह कदम समाज के हर वर्ग और बच्चों के लिए एक बड़ी मिसाल है।
  • संस्कारों की विरासत: अपने दादाजी स्व. भंवरलाल जी पुष्करणा के पदचिन्हों पर चलते हुए दिव्यांशु ने साबित किया है कि संस्कार ही असल पूँजी हैं।
 

क्षेत्र में चहुंओर प्रशंसा

​नापासर गौरक्षा सेवा समिति और समस्त ग्रामवासियों ने दिव्यांशु के इस सेवा भाव की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। लोग कह रहे हैं कि धन्य है नापासर की धरा और धन्य है यह नन्हा राम-भक्त जिसने बचपन में ही सेवा के बीज बो दिए हैं।