वसंतोत्सव सांस्कृतिक और सामाजिक मिलन की बेला है : कमल रंगा*
*परम्परागत पाटी-कॉपी-पेन पूजन के साथ हुआ दो दिवसीय वसंतोत्सव का समापन*
मंदिर प्रन्यास के राजेश रंगा ने बताया कि आज विशेष तौर से तैयार की गई पीले रंग की पोशाक एवं विभिन्न तरह के पीले फूलों से पुजारी विजय कुमार छंगाणी द्वारा पूजन के साथ-साथ परम्परागत पाटी-कॉपी-पेन का पूजन भी किया गया। पूजन उपरान्त बालक-बालिकाओं को कॉपी-पेन प्रदत्त किए गए। साथ ही सभी को रेवड़ी का महाप्रसाद प्रदान किया गया।
इस अवसर पर वसंतोत्सव की प्रासंगिकता के बारे में भी परिसंवाद का आयोजन किया गया। जिसमें वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि वसंतोत्सव सांस्कृतिक और सामाजिक मिलन की बेला है जो शिक्षा और कला का उत्सव है। इस अवसर पर शिक्षाविदï् भवानीसिंह, हरिनारायण आचार्य, हेमलता, सुनील व्यास, अशोक शर्मा, नवनीत व्यास सहित कई बालक-बालिकाओं ने भी वसंत की महत्ता को अपने-अपने विचार रखते हुए वसंतोत्सव को ऋतु परिवर्तन, प्रकृति के सौंदर्य और प्रेम का प्रतीक बताया। इस अवसर पर प्राचीन मंदिर के स्थान पर नवमंदिर निर्माण बाबत भूमि पूजन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन आशीष रंगा ने किया। आभार ज्ञापित तोलाराम सारण ने किया

