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जैसलमेर में आवारा कुत्तों के ठेकेदार की मनमानी: शिकायतों की अनदेखी, मृत पिल्लों को उठाने के एवज में सफाईकर्मी मांग रहे पैसे

 
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कैलाश बिस्सा

​स्वर्णनगरी जैसलमेर में नगर परिषद की लचर कार्यप्रणाली और ठेकेदारों की मनमानी के कारण शहरवासी भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। शहर में आवारा कुत्तों को पकड़ने का जिम्मा संभाल रहे ठेकेदार नरेश पाल सिंह की हठधर्मिता इस कदर बढ़ चुकी है कि वे शिकायतों पर ध्यान देना तो दूर, मीडिया प्रतिनिधियों के फोन का भी टालमटोल कर जवाब देते हैं। शहर में ठेकेदार की इस अघोषित 'मोनोपॉली' से हालात दिन-प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं।

सफाई के नाम पर हो रही अवैध वसूली

नगर परिषद के व्यवस्थाओं की पोल राणा छात्रावास के समक्ष खुलेआम खुल रही है। यहां मृत कुत्तों के बच्चों को उठाने के लिए सफाईकर्मियों द्वारा पैसों की मांग की जा रही है। एक ओर शहर आवारा जानवरों और गंदगी से त्रस्त है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार कर्मचारी अपना कर्तव्य निभाने के बजाय अनुचित मांगें कर रहे हैं।

लोकतंत्र में राजतंत्र जैसा अहसास

आम नागरिकों द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों पर नगर परिषद प्रशासन कोई अमल नहीं कर रहा है। अधिकारियों और ठेकेदारों की इस तानाशाही को देखकर स्थानीय लोगों को अब यह प्रजातंत्र कम और राजतंत्र ज्यादा प्रतीत होने लगा है। नक्कारखाने में तूती की आवाज की तरह, स्वर्णनगरी के निवासियों की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठ रहे गंभीर सवाल

प्रशासनिक अनदेखी के बीच अब सबसे बड़ा सवाल निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका और उनकी कार्यक्षमता पर उठ रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों और ठेकेदारों पर से जनप्रतिनिधियों की पकड़ पूरी तरह कमजोर हो चुकी है। अगर हालात ऐसे ही बेहाल रहे और प्रशासन की नींद नहीं टूटी, तो मजबूरन आम जनता को सड़कों पर उतरना पड़ेगा।