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राष्ट्रीय कवि चौपाल की 573 वीं कड़ी...योग बनावे निरोग सामयिक विषय को समर्पित रही

 
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THE BIKANER NEWS;-बीकानेर:^राष्ट्रीय कवि चौपाल की 573 वीं कड़ी...योग बनावे निरोग सामयिक विषय को समर्पित रही आज कार्यक्रम अध्यक्षता में  नित्य योग अभ्यासी सरदार अली परिहार, मुख्य अतिथि में समाज सेवी, योगाचार्य विनोद जोशी, विशिष्ट अतिथि में डॉ हरिदास हर्ष, संगीत अनुरागी राधा किशन सोनी आदि मंच सुशोभित हूए कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व बौद्धिक में कहा कि  *योग में समाहित स्वस्थ प्रसन्न सफल, मुक्ति के प्रबल योग"* यानी तन मन अन्तर्मन की स्वस्थता स्वतः बनती जो हमें भक्ति ज्ञान वैराग्य के सफ़र से, योग दर्शन में, मुक्ति के आनन्द दिलाती है, कार्यक्रम अध्यक्ष श्री सरदार अली परिहार ने सरल योग के  क्रियात्मक प्रदर्शन में कहा योग तन मन दोनों की शुद्धि में करता है, मुख्य अतिथि विनोद जी जोशी  ने स्व बौध्दिक में सार बात कही कहा विश्व ने भारत के योग ऋषि परंपरा को स्वीकारा, कारण एक यही। योगेश्वर श्रीकृष्ण का अद्वितीय योग सिद्धि का कोई अन्य विकल्प नहीं।। विशिष्ट अतिथि डॉ हरिदास हर्ष ने राजस्थानी काव्य माध्यम से इये कैयो, बिये कैयो, म्हें कैयो, थै कैयो, किण कैयो, क्यों कैयो, किणी नै नीं ठा... काल तांई रा गैळ सै आज सिगळा बदळिज्योडा़ है,... संगीत दिवस पर संगीत अनुरागी राधा किशन सोनी ने कवि चौपाल की सार्थकता पर गीत में अपनी बात रखी,...  मैं कहीं कवि न बन जाऊं तेरे प्यार में कविता, इससे पूर्व साधक ने "प्रज्ञा स्मृति, मेधा तुष्टि, सावित्री मां भारती" सरस्वती वंदना की 
      
      प्रमोद कुमार शर्मा : कृष्ण कयो है गीताजी में समता ही योग हुवै। बिना योग रै जीवन थांरो, पशुओं रै सम भोग  हुवै,.. कैलाश टाक मेरी कविता में हाथ नहीं पंजा है, जितने  कामयाब हुए उनके साथ गंजा है।   बम चकरी : थनें चिंत्या री कोई बात नहीं, मोटापो आवै तो आवण दे,  शिव दाधीच बीकानेरी : याद रखो, अन्याय कभी इतिहास नहीं बन पाता है, मेहनत का दिनकर ही तम का सीना चीर दिखाता है। ..  आचार्य पम्मी कोचर : देखो भैया बड़ा सोल है, देखो भैया बड़ा झोल है, मेहराजुद्दीन एडवोकेट कहीं खो गया हूं, इसलिए खुद को ढूंढने लगा हूं,..  सिराजुद्दीन भुट्टा मुझे अंकल जी कहने वाले तेरी ऐसी की तैसी 

*इसी बीच  योगाचार्य श्री विनोद जोशी का योग सिद्धियां संदर्भ राष्ट्रीय कवि चौपाल समूह के द्वारा शाॅल, श्री फल, रत्न जड़ित मोतियन माला से आत्मीय स्वागत किया गया* 

रामेश्वर साधक : सतर साल री उमर में सतरै रो मनोबळ अर मुग्ति मौको भणावै योग, ..  ज्योति स्वामी : मछली सी कर्मठ सतत प्रवाह में बहती है योगिनी, विपरीत धाराओं में भी अपना पथ गढती है योगिनी...   के. के व्यास :  इडा, पिंगला साथ दे प्राण सुष्मना होय.. उड़ रहे पंछी जैसे सुनलो मेरे प्राण,... विशाल भारद्वाज : मैं हंसते हुए हुए लम्हों का साथ निभाता चला गया, मैं दोस्तों का साथ निभाता चला गया,...   मोहम्मद सलीम भाटी राम जी री चिड़िया राम जी रा खेत,..  पवन चड्ढ़ा : जिंदाबाद जिंदाबाद ऐ मुहब्बत जिंदाबाद 
     आज़ के कार्यक्रम में 18 साहित्य बौद्धिक काव्य प्रस्तुतियां दी गई,  साहित्य अनुरागियों में भवानी सिंह शिवबाड़ी, घनश्याम सौलंकी, भवानी शंकर सुथार, छोटू खां बाबू,  किशनलाल सरदाना, मेघराज, शिवाजी दास, साकिर हुसैन पत्रकार, श्री कांत आदि कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन चुटिले शायराने अंदाज में, आध्यात्म प्रवाह से मय दार्शनिक द्रष्टांत से आकाशवाणी उद्घघोषक प्रमोद कुमार शर्मा ने किया