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राष्ट्रीय कवि चौपाल 583 वीं कड़ी आध्यात्म एवं वर्तमान को समर्पित रही

 
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THE BIKANER NEWS:;यूं ही नहीं मिलती हुकुमत की कुर्सी, बस्तियों को श्मसान बनाना पड़ता है,..

मनु स्मृति एवं गीता रामायण  पर भ्रामक प्रचार से बचें 

मुझे तूं खार ही देना गुलों के हार मत देना,

छोटा बन ओछा न बन, 

कौन कहता है कि हम मौत से डर जाएंगे

राष्ट्रीय कवि चौपाल 583 वीं कड़ी आध्यात्म एवं वर्तमान को समर्पित रही आज कार्यक्रम अध्यक्षता में श्री के के शर्मा मुख्य अतिथि में राजेन्द्र स्वर्णकार विशिष्ट अतिथि में सागर सिद्धिकी, डॉ हरिदास हर्ष सरदार अली परिहार आदि मंचासीन हुए कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व बौद्धिक में कहा कि सृष्टि संचलन में साहित्य सृजन प्रथम ईश्वरीय कार्य है और यथार्थ साहित्य वृंद ईश्वर को परम प्रिय होते हैं। ... ज्योतिर्मयी वागीश्वरी हे शारदे धी दायिनी..  राजेन्द्र स्वर्णकार ने मां सरस्वती की शानदार प्रार्थना सुनाकर कार्यक्रम को गति दी.. 
         कार्यक्रम अध्यक्ष श्री के के शर्मा ने समाज संस्कृति मनु स्मृति एवं गीता रामायण की प्रासंगिकता बल देते हुए पर भ्रामक प्रचार से बचने को कहा तथा भ्रामकता पर भावी पीढ़ी के हित में प्रामाणिक आंकलन की विधि व्यक्त की.. मुख्य अतिथि राजेन्द्र स्वर्णकार : मुझे तूं खार ही देना गुलों के हार मत देना, मगर अंगुली उठे ऐसा मुझे किरदार मत देना... हो जाएगा खत्म सफर, कदमों के निशां खो जाएंगे..  सागर सिद्धिकी : आंखों से तेरी जो टपका है, मेरे आंसू का कतरा है.. यूं ही नहीं मिलती हुकुमत की कुर्सी, बस्तियों को श्मसान बनाना पड़ता है,.. डॉ हरिदास हर्ष  : छोटा बन ओछा न बन,  पेंटागन अनमोल है...   सरदार अली परिहार ने साहित्य संदेश में वाणी पर संयमित रहते हुए लेखन पर पकड़ रखने को कहा 
       वली मोहम्मद गौरी रजवी वली  : कौन कहता है कि हम मौत से डर जाएंगे, तेरे आशिक है तेरे नाम पे मर जाएंगे..  बम चकरी : लाईन साईन लुगाई अर घुमाई ऑन लाइन है.. लाखों रो लेनों लाखों रो देणो लाखों री भरपाई ऑन लाइन है,..   डॉ कृष्ण लाल विश्नोई :  करें क्या गुलजार की बातें कहीं वो गुलजार न रही,  कहना अब गंगा का क्या, उसकी वो धार न रही.. रामेश्वर साधक  :  सुनले..! समझले..!! हे मृत्यु..!!! मैं सत्कर्मों में संलग्न.. तुम्हें मेरा इन्तजार करना पड़ेगा,..  मधुरिमा सिंह : नेपाल के त्रिशुली नदी तांडव देख, सभी सिहर उठे,आंखों में आए आंसू ..  कृष्णा वर्मा : जो इंसानियत से जुदा हो गए वही आजकल के खुदा हो गये 
पवन चड्ढ़ा : तेरी गलियों में न रखेंगे कदम आज के बाद, तेरे मिलने, ..  राधा किशन सोनी :  मेरे टुटे हुए दिल से कोई तो आज..  नरेश नाथ : लाचारी और लाचार हो गई, भ्रष्टाचारी तेरे आगे किस्मत सो गई...  राजकुमार भाटिया :  चुनावी मौसम में बरसाती मेंढक टर्रटर्राएंगे 

आज कार्यक्रम में 15 प्रस्तुतियां हुई तथा कार्यक्रम में महेश हर्ष, घनश्याम सौलंकी, धर्मेंद्र राठोड़ धन्नजय, महबूब अली, साकिर पत्रकार, छोटू खां, मानो आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन चुटिले शायराने रसीले अंदाज में बाबू बमचकरी ने किया जबकि आभार व्यक्त डॉ हरिदास हर्ष ने किया

जय साहित्य जय साहित्यकार