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पांडुलिपियों के संरक्षण और अध्ययन में AI की नई क्रांति

 
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राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान बीकानेर के द्वारा पांडुलिपियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर आज व्याख्यान आयोजित किया गया/ व्याख्यनकर्ता एशियाटिक सोसायटी कोलकाता के निदेशक लेफ्टिनेंट अनंत सिन्हा थे उन्होंने अपने व्याख्यान के माध्यम से यह बताने की कोशिश करी की किस तरीके से एशियाटिक सोसाइटी के द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल के रूप में विधुवनिका एवं अनुकृति नाम से टूल बनाए गए हैं जिनके माध्यम से अपठनीय पांडुलिपियों को पढ़ना अब सरल हो जाएगा अपने उद्बोधन के दौरान उन्होंने इन ए आई टूल के विभिन्न चरणों को क्रमबद्ध रूप से समझाया और किस तरीके से लैंग्वेज मॉड्यूल बनाने की प्रक्रिया के अंदर विषय विशेषज्ञों भाषाविदों की आवश्यकता है उन्होंने यह भी बताया कि इन सब चीजों को तैयार करने के लिए हमें अपनी कैपेसिटी बिल्डिंग को भी बनाना होगा जिसके तहत भाषा विशेषज्ञ टेक्नोक्रेट के एक संयुक्त प्रयास की आवश्यकता है डॉ सिन्हा ने अपने व्याख्यान में यह भी बताया कि किस तरीके से एक पांडुलिपि की कंपोजिट प्रतिकृति बनाकर उसके इतिहास उसकी लिपि इसकी स्क्रिप्ट को भी जाना और समझा जा सकता है ताकि एक लार्जर कॉन्टेक्स्ट में उसके उपस्थिति को प्रभावी रूप से दर्शाया जा सके इस पूरी प्रक्रिया में डिजिटाइज किए डाटा को प्री प्रोसेसिंग के माध्यम से लाइन टू लाइन उसका डिडक्शन किया जाता है जिससे उसकी ए प्रोसेस मॉडल के अनुरूप तैयार किया जा सके और तदुपरांत उसे पत्नी को वर्तमान क्वालिटी भाषा में उसमें परिवर्तित किया जाता है जिससे उसके अंदर के तथ्यों को पढ़ने समझने के अंदर बहुत आसानी रहती है/ उल्लेखनीय है कि ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपियों का सर्वे अभी करवाया जा रहा है संपूर्ण भारत के अंदर राजस्थान 16 लाख पांडुलिपियों के साथ देश में सिर्फ स्थान के ऊपर है इसमें बीकानेर जिला राजस्थान के अंदर 3:30 दृष्टि से दूसरे स्थान पर है जिले के ज्ञान भारतम् नोडल अधिकारी डॉ नितिन गोयल के अनुसार इस व्याख्यान को आयोजित करने के पीछे यह उद्देश्य भी था कि राजस्थान के अंदर सर्वाधिक डिजिटाइजेशन का जो कार्य है वह बीकानेर के ही संस्थाओं के द्वारा करवाया गया है परंतु इस डिजिटाइजेशन को अभी भी आम जनता शोधार्थियों के द्वारा पठन योग्य नहीं पाया गया है ऐसी स्थिति में किस तरीके से आधुनिक तकनीक कृत्रिम विद्वता का उपयोग कर कर इस डिजिटाइज किए हुए डाटा को अधिक से अधिक संख्या के अंदर शोधार्थियों के को तक पहुंचाने के लिए पठन योग्य बनाया जाना आवश्यक है इस व्याख्यान को कला संस्कृति विभाग की शासन उप सचिव श्रीमती अनुराधा के द्वारा भी उद्बोधित किया गया इस व्याख्यान में छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, कोलकाता, कर्नाटक,उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान के विभिन्न शोधार्थियों, भाषाविद द्वारा सुना गया/ बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जीवन के हर पक्ष के अंदर अपना योगदान दे रही है ऐसे मे किस तरीके से भारतीय ज्ञान परंपरा की थाती इन पांडुलिपियों को पठन में आई का उपयोग सर्वसम्मति से और उन्मत्त से किया जा सके उसे दिशा में यह आयोजन राजस्थान के लिए एक अपने आप में एक बड़ा अवसर है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान द्वारा गत सप्ताह में कई ऐसे उपयोगी व्याख्यानों का आयोजन किया गया जिनके अंदर जिनमें प्रमुख हैं सुनहरी कलम के ऊपर बीकानेर के श्री राम द्वारा व्याख्यान दिया गया प्लीज, अभिलेख के स्रोतों के ऊपर डॉ गिरजा शंकर जी के द्वारा व्याख्यान दिया गया, छतरी एवं हवेली संरक्षण के ऊपर डॉ मुकेश हर्ष के द्वारा व्याख्यान दिया गया, लिपि के भाषा के ऊपर डॉ राजेंद्र कुमार द्वारा व्याख्यान दिया गया एवं इसी कड़ी के अंदर आज पांडुलिपियों एवं आई के उपयोग पर आज की व्याख्या किया गया इसी के साथ यह श्रृंखला आज समाप्त हुई इस पूरी व्याख्यान श्रृंखला के अंदर वनस्थली विश्वविद्यालय के छात्रों और इतिहास विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर शिल्पी गुप्ता का भी बड़ा योगदान रहा।