अमेरिका-ईरान के बीच 40 दिन बाद जंग थमी, पाकिस्तान की अपील पर 2 हफ्ते का सीजफायर
ट्रम्प की ईरान को सख्त चेतावनी
सीजफायर पर सहमति बनने से पहले राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर रणनीतिक रूप से अहम 'होर्मुज स्ट्रेट' से जहाजों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिला, तो वह ईरान की पूरी सभ्यता को खत्म कर देंगे। इसके अलावा, उन्होंने ईरान के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी सीधे हमले की धमकी दी थी।
क्या हैं सीजफायर समझौते की शर्तें?
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते के तहत कई अहम फैसले लिए गए हैं:
- हमलों पर रोक: समझौते के लागू होते ही अमेरिका और इजराइल ईरान पर अपने हमले रोक देंगे। इसके जवाब में ईरान भी अपनी तरफ से की जा रही सैन्य कार्रवाई बंद करेगा।
- होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा: इस सीजफायर के दौरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल, गैस और अन्य व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की जिम्मेदारी ईरानी सेना पर होगी। वे अपनी मदद से इस रास्ते को सुरक्षित बनाएंगे।
- अन्य क्षेत्रों में भी लागू: यह संघर्ष विराम सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लेबनान समेत मिडिल-ईस्ट के अन्य तनावग्रस्त क्षेत्रों पर भी लागू माना जाएगा।
इस्लामाबाद में होगी अगली बातचीत
इस दो हफ्ते के अस्थाई सीजफायर के बाद, स्थायी शांति की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा। तय कार्यक्रम के अनुसार, 10 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक स्तर की बातचीत शुरू होगी। खास बात यह है कि इस अहम बैठक के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को चुना गया है।

