कोलकाता: 'उद्बोधन आश्रम' में 'मा सारदा धाम' का भव्य लोकार्पण, 50 वर्षों बाद हुआ ऐतिहासिक निर्माण
Nov 30, 2025, 14:01 IST
कोलकाता न्यूज़:-महानगर के ऐतिहासिक बागबाज़ार स्थित 'उद्बोधन आश्रम' (मायेर बाड़ी) परिसर में शनिवार को श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत संगम के बीच नवनिर्मित ‘मा सारदा धाम’ का भव्य शुभारम्भ संपन्न हुआ। स्वामी प्रेमानन्दजी महाराज की पावन तिथि पूजा के अवसर पर आयोजित इस समारोह ने आश्रम के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
अध्यक्ष महाराज ने किया लोकार्पण
समारोह की भव्यता उस समय और बढ़ गई जब रामकृष्ण मठ और मिशन के परम पूज्य अध्यक्ष, स्वामी गौतमानन्दजी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक वातावरण के बीच भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर रामकृष्ण मठ और मिशन के महासचिव स्वामी सुविरानन्दजी महाराज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
समारोह में राज्य के शहरी विकास मंत्री श्री फिरहाद हकीम और मंत्री डॉ. शशि पांजा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस पुनीत कार्य की सराहना की।
50 वर्षों में पहला बड़ा निर्माण
आश्रम के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण था। आश्रमाध्यक्ष स्वामी नित्यमुक्तानन्दजी ने बताया कि पिछले 50 वर्षों में आश्रम परिसर के भीतर यह पहली बार है जब इतना व्यापक और विशाल निर्माण कार्य पूरा हुआ है। यह नया भवन साधना, सेवा और समर्पण की परंपरा को नई गति प्रदान करेगा।
भवन की विशेषताएँ
'मा सारदा धाम' को आध्यात्मिक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप एक बहुउद्देशीय भवन के रूप में विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख सुविधाओं में शामिल हैं:
संन्यासियों और भक्तों के लिए अलग-अलग भोजनालय।
एक सुगठित और आधुनिक रसोई।
संन्यासियों के लिए आवासीय कक्ष।
दीक्षा समारोहों के लिए एक विशिष्ट और भव्य प्रांगण।
'ईंट-पत्थर नहीं, आध्यात्मिक ज्योति का प्रतीक'
इस अवसर पर भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी सुविरानन्दजी महाराज ने कहा, “‘मा सारदा धाम’ केवल ईंट और पत्थरों का निर्माण नहीं है, बल्कि यह उस आध्यात्मिक जीवन की ज्योति का प्रतीक है जो प्रेम, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा से प्रज्वलित होती है।”
स्वामी नित्यमुक्तानन्दजी के आमंत्रण पर बड़ी संख्या में साधकों और भक्तों ने सामूहिक प्रार्थना में भाग लिया और इस दिव्य क्षण के साक्षी बने। यह भवन आने वाले समय में साधकों के लिए प्रेरणा और चिंतन का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।
अध्यक्ष महाराज ने किया लोकार्पण
समारोह की भव्यता उस समय और बढ़ गई जब रामकृष्ण मठ और मिशन के परम पूज्य अध्यक्ष, स्वामी गौतमानन्दजी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक वातावरण के बीच भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर रामकृष्ण मठ और मिशन के महासचिव स्वामी सुविरानन्दजी महाराज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
समारोह में राज्य के शहरी विकास मंत्री श्री फिरहाद हकीम और मंत्री डॉ. शशि पांजा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस पुनीत कार्य की सराहना की।
50 वर्षों में पहला बड़ा निर्माण
आश्रम के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण था। आश्रमाध्यक्ष स्वामी नित्यमुक्तानन्दजी ने बताया कि पिछले 50 वर्षों में आश्रम परिसर के भीतर यह पहली बार है जब इतना व्यापक और विशाल निर्माण कार्य पूरा हुआ है। यह नया भवन साधना, सेवा और समर्पण की परंपरा को नई गति प्रदान करेगा।
भवन की विशेषताएँ
'मा सारदा धाम' को आध्यात्मिक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप एक बहुउद्देशीय भवन के रूप में विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख सुविधाओं में शामिल हैं:
संन्यासियों और भक्तों के लिए अलग-अलग भोजनालय।
एक सुगठित और आधुनिक रसोई।
संन्यासियों के लिए आवासीय कक्ष।
दीक्षा समारोहों के लिए एक विशिष्ट और भव्य प्रांगण।
'ईंट-पत्थर नहीं, आध्यात्मिक ज्योति का प्रतीक'
इस अवसर पर भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी सुविरानन्दजी महाराज ने कहा, “‘मा सारदा धाम’ केवल ईंट और पत्थरों का निर्माण नहीं है, बल्कि यह उस आध्यात्मिक जीवन की ज्योति का प्रतीक है जो प्रेम, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा से प्रज्वलित होती है।”
स्वामी नित्यमुक्तानन्दजी के आमंत्रण पर बड़ी संख्या में साधकों और भक्तों ने सामूहिक प्रार्थना में भाग लिया और इस दिव्य क्षण के साक्षी बने। यह भवन आने वाले समय में साधकों के लिए प्रेरणा और चिंतन का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।

