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सोनार दुर्ग में आमजन पर सख्ती, VIP वाहनों को छूट—प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

 
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जैसलमेर | कैलाश बिस्सा।स्वर्णनगरी जैसलमेर में स्थित विश्वविख्यात सोनार दुर्ग इन दिनों आमजन के लिए नहीं, बल्कि वीआईपी व्यवस्था का प्रतीक बनता जा रहा है। दुर्ग में वीआईपी वाहनों को अनुमति दिए जाने और बुजुर्गों, असहायों व दिव्यांगों को टैक्सी अथवा अन्य साधनों से दुर्ग तक जाने पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर शहरभर में आक्रोश और चर्चा तेज हो गई है।
ताज़ा मामला एक पूर्व सैनिक से जुड़ा है, जो अपनी बुजुर्ग मां को दुर्ग दर्शन कराने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि संबंधित प्रशासन के नियमों के चलते उन्हें भी अनुमति नहीं दी गई, जिससे मजबूर होकर उन्हें लौटना पड़ा। यह घटना न केवल संवेदनशीलता की कमी को दर्शाती है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई बुजुर्ग, दिव्यांग या असहाय व्यक्ति अचानक बीमार हो जाए और उसे दुर्ग क्षेत्र से चिकित्सालय ले जाना हो, तो इस प्रकार की पाबंदियां मानवीय संकट को और बढ़ा सकती हैं। जब इस संदर्भ में मौके पर तैनात सुरक्षा कर्मियों से अनुमति मांगी गई, तो उन्होंने भी उच्च अधिकारियों का हवाला देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
शहरवासियों का आरोप है कि एक लोकतांत्रिक देश में इस तरह की “नादिरशाही” व्यवस्था समझ से परे है, जहां आमजन के लिए नियम कठोर हैं और विशेष वर्ग के लिए रास्ते खुले हैं। यह व्यवस्था मानवता को शर्मसार करने वाली है और प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करती है।
फिलहाल इस पूरे मामले पर संबंधित प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। सोनार दुर्ग की यह अव्यवस्था अब यक्ष प्रश्न बनकर खड़ी है—क्या नियम केवल आम लोगों के लिए हैं, और क्या बुजुर्गों व असहायों की पीड़ा प्रशासन को दिखाई नहीं देती?