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मोकला पंचायत को रामगढ़ समिति में शामिल करने पर फूटा जनाक्रोश, ग्रामीणों ने राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

 
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सब-हेडिंग: दूरी बढ़ने और प्रशासनिक कामकाज में आने वाली दिक्कतों को लेकर जनता में भारी रोष, फैसला वापस लेने की मांग।

जैसलमेर। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में पंचायत पुनर्गठन को लेकर लिए गए फैसलों के खिलाफ अब विरोध के स्वर उठने लगे हैं। जिले की मोकला ग्राम पंचायत को जैसलमेर पंचायत समिति से हटाकर नवसृजित रामगढ़ पंचायत समिति में शामिल करने के विरोध में ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। नाराज ग्रामीणों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

ग्रामीणों के साथ कुठाराघात

ज्ञापन में बताया गया कि मोकला पंचायत वर्षों से जैसलमेर समिति का हिस्सा रही है। सरकार का इसे तोड़कर रामगढ़ में मिलाने का फैसला मोकला वासियों के साथ कुठाराघात है। इस निर्णय से स्थानीय जनता में सरकार के प्रति भारी नाराजगी और द्वेष का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी तहसील, जिला मुख्यालय, कॉलेज और अस्पताल सभी जैसलमेर में स्थित हैं, ऐसे में पंचायत समिति बदलने से उनका प्रशासनिक और निजी कार्य बुरी तरह प्रभावित होगा।

दूरी बनी सबसे बड़ी मुसीबत

ग्रामीणों ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि भौगोलिक दृष्टि से यह फैसला पूरी तरह अव्यावहारिक है। मोकला से जैसलमेर की दूरी मात्र 29 किलोमीटर है, जबकि रामगढ़ यहाँ से 38 किलोमीटर दूर पड़ता है। सबसे बुरा हाल लानेला ग्राम वासियों का होगा, जिनके लिए जैसलमेर महज 20 किलोमीटर था, लेकिन अब उन्हें अपने कार्यों के लिए 50 किलोमीटर दूर रामगढ़ जाना पड़ेगा।

दोहरे प्रशासन की मार झेलनी पड़ेगी

विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बताया कि इस फैसले से आम जनता दोहरे प्रशासन के चक्रव्यूह में फंस जाएगी। एक हस्ताक्षर करवाने के लिए रामगढ़ जाना पड़ेगा और दूसरे काम के लिए जैसलमेर। गरीब जनता के लिए यह समय और धन दोनों की बर्बादी है।

सरकार से बहाली की मांग

ग्रामीणों ने सरकार से अपील की है कि गांव वालों की विकट परिस्थितियों और समस्याओं को मद्देनजर रखते हुए इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और मोकला पंचायत को वापस जैसलमेर समिति में बहाल किया जाए।