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श्री डूंगरगढ़ की बेटी को साहित्य साधना हेतु मिला सम्मान: डॉ. सीता देवी राठी का कूच बिहार माहेश्वरी महिला मंडल ने किया अभिनंदन

 
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THE BIKANER NEWS:-कूच बिहार, 19 अप्रैल 2026:  साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रख्यात लेखिका एवं शिक्षाविद् डॉ. सीता देवी राठी श्री डूंगरगढ़ निवासी और कूच बिहार प्रवासी को कूच बिहार माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा भावपूर्ण स्वागत एवं सम्मान अभिनंदित किया गया।

रविवार को उनके आवास पर जाकर  डॉ. राठी का स्वागत किया। इस अवसर पर शहर के गणमान्य नागरिक, साहित्य प्रेमी और मंडल की सदस्याएं उपस्थित रहीं।

*साहित्यिक यात्रा पर एक नज़र*  
डॉ. सीता देवी राठी ने हिंदी साहित्य की विविध विधाओं, कविता, कहानी, निबंध और आलोचना में सतत लेखन किया है। 
उनका काव्य संग्रह *काव्य अमृत*अमेजॉन प्लेटफार्म पर उपलब्ध है ।नारी-जीवन के यथार्थ, सामाजिक सरोकार और मानवीय मूल्यों को केंद्र में रखकर लिखी गई उनकी रचनाएँ पाठकों और समीक्षकों द्वारा सराही गई हैं। कई पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है।
असम मुख्यमंत्री और राजस्थान उपमुख्यमंत्री द्वारा सम्मान मिलने के साथ-साथ आदरणीय नरेंद्र मोदी जी ने भी उनके काव्य के लिए धन्यवाद शुभकामना पत्र भेजा था।

महिला मंडल की सदस्य मंजू जी शारदा ने अपने स्वागत भाषण में कहा, "डॉ. सीता राठी सिर्फ लेखिका नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशील आंख हैं। उनकी कलम ने स्त्री-विमर्श को नई दिशा दी है। उनका सम्मान करना माहेश्वरी समाज की हर बेटी का सम्मान है।"
वही शांत माहेश्वरी ने उनके काव्य को उच्च कोटि का बताते हुए सराहना की।

*राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त साहित्यकार*  
डॉ. राठी की लेखनी केवल कूच बिहार तक सीमित नहीं है। असम सरकार द्वारा पूर्वोत्तर की भाषा-संस्कृति पर उनके शोधपरक लेखन के लिए उन्हें राज्य स्तरीय साहित्य सम्मान से नवाज़ा जा चुका है। वहीं राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बेरुआ जी ने जयपुर में आयोजित समारोह में *नारी गौरव सम्मान* प्रदान किया था। हिंदी साहित्य और राजस्थानी लोक संस्कृति के सेतु के रूप में उनके योगदान को सराहते हुए अभी हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर  शब्द श्री प्रतिभा बहू क्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल द्वारा *स्त्री शक्ति सम्मान* से अलंकृत किया गया ।

*डॉ. राठी ने साझा किए विचार*  
सम्मान के प्रत्युत्तर में डॉ. राठी भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा, "असम की ब्रह्मपुत्र और राजस्थान का मरुस्थल, दोनों ने मेरी कलम को शब्द दिए। पर कूच बिहार की माटी मेरी जननी है। आज माहेश्वरी बहनों से मिला स्नेह मेरे लिए किसी भी राष्ट्रीय पुरस्कार से बड़ा है।" उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि घर-गृहस्थी के साथ-साथ सृजन को भी समय दें।

*डॉ. राठी का संबोधन*  
सम्मान ग्रहण करने के बाद डॉ. राठी ने कहा, "लेखन मेरे लिए साधना है, सौदा नहीं। जब समाज पढ़ता है, चर्चा करता है, तभी रचना पूरी होती है। माहेश्वरी महिला मंडल ने आज लेखनी को जो मान दिया है, वह हर महिला रचनाकार का हौसला बढ़ाएगा।" उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि मोबाइल की दुनिया से थोड़ा समय निकालकर किताबों को मित्र बनाएं।