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*राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार ठोस कार्रवाई शीघ्र करे : कमल रंगा*
*शिक्षण सामग्री राजस्थानी भाषा में ही हो, न की बोलियों में : कमल रंगा

 
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THE BIKANER NEWS:^

बीकानेर 13 मई, 2026।राजस्थानी युवा लेखक संघ एवं प्रज्ञालय संस्थान द्वारा वर्ष 1980 से करीब साढ़े चार दशकों से राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता, संवैधानिक प्रावधानों के चलते प्रदेश की दूसरी राज भाषा घोषित करवाना एवं वर्ष 1982 से निरंतर मातृभाषा राजस्थानी में प्राथमिक स्तर से शिक्षा देने की मांग हर स्तर पर निरंतर उठाई गई है। 

राजस्थानी मान्यता आंदोलन के प्रवर्तक कमल रंगा ने बताया कि 14 करोड़ लोगों की जनभावना, अस्मिता एवं सांस्कृतिक पहचान उनकी मातृभाषा आजादी के बाद से करीब 8 दशकों से अपने वाजि़ब हक-हकूकों के लिए राजस्थानी हेताळूओं के माध्यम से संघर्षरत रही है। परन्तु आज भी राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता न मिलना एवं प्रदेश की दूसरी राजभाषा घोषित नहीं होना दु:खद पहलू है।

रंगा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्थानी भाषा बाबत संघर्षरत हेताळूओं के लिए 12 मई, 2026 एक ऐतिहासिक दिन रहा, क्योंकि इस दिन देश के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रमनाथ एवं न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एक ऐतिहासिक फैसला करते हुए संविधान के अनुच्छेद 21 ए - शिक्षा का अधिकार, अनुच्छेद 29 - भाषा और संस्कृति की रक्षा का अधिकार एवं अनुच्छेद 350 ए - मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था के आधार पर प्रदेश के राजकीय एवं निजी विद्यालयों में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में लागू करने के लिए निर्देश दिए हैं। 

रंगा ने आगे बताया कि माननीय न्यायमूर्ति ने अपने निर्णय में राज्य सरकार को निर्देश देते हुए इस बाबत नीति बनाने, इसे लागू करने आदि के निर्देश दिए एवं 30 सितंबर, 2026 तक इस बाबत अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया। 

रंगा ने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले से करोड़ों लोगों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है। साथ ही इस निर्णय से निश्चित तौर पर राजस्थानी भाषा और लोक संस्कृति संरक्षण के साथ-साथ युवा पीढ़ी अपनी मातृभाषा से जुडक़र बेहतर शिक्षा ग्रहण कर पाएगी और युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेगी। रंगा ने इस अवसर पर राज्य सरकार से इस बाबत शीघ्र कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि पाठ्यक्रम सामग्री को राजस्थानी बोलियों की बजाय राजस्थानी भाषा में ही तैयार करवाया जाए।